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शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी, आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने दिया प्रेरणादायी संदेश

Moradabad मुरादाबाद : तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) में गुरुवार और शुक्रवार का दिन आध्यात्मिक चेतना, श्रद्धा और ज्ञान के अद्भुत संगम का साक्षी बना। विश्वविद्यालय परिसर में चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक योगी और पट्टाचार्य आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का 24 संतों सहित कुल 25 मुनिराजों के ससंघ आगमन हुआ। संतों के आगमन से पूरा विश्वविद्यालय परिसर भक्ति, संयम, संस्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के आगमन पर गुरुवार शाम विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान कुलाधिपति परिवार, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने पुष्पवर्षा कर आचार्य श्री और उनके ससंघ का अभिनंदन किया। इस अवसर पर णमोकार मंत्र के पवित्र उच्चारण, मंगल गीतों और भक्ति संगीत से वातावरण भक्तिमय हो गया।
स्वागत के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज अपने ससंघ के साथ विश्वविद्यालय जिनालय पहुंचे, जहां विधि-विधान के साथ पाद-प्रक्षालन, मंगल आरती और पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद संत भवन तक निकाली गई मंगल यात्रा में श्रद्धालुओं ने अनुशासन और श्रद्धा का परिचय दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शुक्रवार सुबह विश्वविद्यालय के रिद्धि-सिद्धि भवन में भगवान महावीर की शांतिधारा और अष्ट-द्रव्य अर्घ समर्पण का विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलाधिपति सुरेश जैन और उनके परिवार द्वारा प्रथम जल-अर्घ अर्पित कर किया गया। इसके बाद दिगंबर जैन समाज, विश्वविद्यालय परिवार, शिक्षक, विद्यार्थी और देशभर से आए श्रद्धालुओं ने चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल अर्पित कर भगवान महावीर के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
इस अवसर पर आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने महत्वपूर्ण ग्रंथ “वस्तुत्व महाकाव्य” की प्रतियां आशीर्वाद स्वरूप कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन को भेंट कीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की कि इस ग्रंथ को जिनालय और केंद्रीय पुस्तकालय में अध्ययन एवं शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जैन दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक साहित्य पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को लाभ मिलेगा।
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति में विवेक, संस्कार और आत्मबोध का विकास होना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से भारतीय आगमों तथा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान का अध्ययन करने का आह्वान किया।
आचार्य श्री ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में ज्ञान, विज्ञान और दर्शन के अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत छिपे हुए हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने टीएमयू की सराहना करते हुए कामना की कि विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करे और यहां से ज्ञान का प्रकाश पूरे विश्व में फैले।
इस दौरान चांसलर आवास “संवृद्धि” में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का विधिपूर्वक आहार संपन्न हुआ। वहीं, ससंघ के अन्य 24 संतों का आहार विश्वविद्यालय परिसर के अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ कराया गया। कार्यक्रम में वीना जैन, ऋचा जैन, जहान्वी जैन सहित विश्वविद्यालय परिवार और दिगंबर जैन समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
विद्वान पंडित ऋषभ शास्त्री की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया। शुक्रवार शाम आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज अपने ससंघ के साथ टीएमयू परिसर से मंगल विहार के लिए रवाना हुए। हालांकि उनके प्रस्थान के बाद भी विश्वविद्यालय परिसर में उनके विचारों, संयमपूर्ण जीवन और आध्यात्मिक संदेश की गूंज बनी रही।
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा और अध्यात्म के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण भी बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मअनुशासन और मानवीय मूल्यों का समावेश ही शिक्षा को पूर्ण बनाता है। टीएमयू में संतों के आगमन ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को आध्यात्मिक चिंतन के साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा दी।





