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उत्तर प्रदेश
CM योगी का तीखा तंज, बोले कांग्रेस का लोकतंत्र पर ज्ञान देना हास्यास्पद
Ratna Netam
5 Nov 2026 4:26 PM IST

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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। गाजियाबाद में भारतीय जनता पार्टी के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत आयोजित पदयात्रा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश में आपातकाल लागू किया था, उसी पार्टी का आज लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर उपदेश देना बेहद हास्यास्पद है। योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपने राजनीतिक हितों के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां जनता अपने मताधिकार के माध्यम से सरकार चुनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव हारने के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तथा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में हार और जीत सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन चुनावी परिणामों को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना उचित नहीं है।योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को उसके राजनीतिक इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। उस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए और अनेक विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया। प्रेस पर भी सेंसरशिप लागू की गई थी। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की वर्तमान लोकतंत्र संबंधी राजनीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज लोकतंत्र की रक्षा का दावा कर रही है, जबकि उसके शासनकाल में देश ने आपातकाल का दौर देखा था। योगी ने इसे राजनीतिक विरोधाभास बताते हुए कहा कि जनता को इतिहास की घटनाओं को याद रखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही है।मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम पर उठाए जा रहे सवालों की आलोचना की। योगी ने तर्क दिया कि विपक्षी दल जब चुनाव जीतते हैं तो परिणाम स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन हार मिलने पर चुनावी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष को चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो उसी प्रक्रिया से निर्वाचित प्रतिनिधि पद और गोपनीयता की शपथ क्यों लेते हैं।योगी आदित्यनाथ ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी दलों की रैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर अपने राजनीतिक और पारिवारिक हितों को बचाने का प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों पर परिवारवादी राजनीति करने का भी आरोप लगाया।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक नवंबर की तारीख देश के इतिहास में सिख विरोधी हिंसा की दुखद घटनाओं से जुड़ी है। योगी ने इस तारीख को विपक्षी दलों द्वारा राजनीतिक रैली आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए। हालांकि, 1984 की हिंसा और वर्तमान विपक्षी राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच संबंध स्थापित करना मुख्यमंत्री का राजनीतिक तर्क है।
गौरतलब है कि देश में वर्ष 1975 से 1977 तक लगभग 21 महीने आपातकाल लागू रहा था। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियों, प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस दौर को अत्यंत विवादास्पद माना जाता है। भाजपा लंबे समय से आपातकाल के मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना करती रही है।वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल वर्तमान समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार तथा भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। कांग्रेस ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देने के लिए देशभर में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न राज्यों में पदयात्राएं, जनसभाएं और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भाजपा का कहना है कि विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और चुनावी व्यवस्था पर लगाए जा रहे आरोपों का जनता के बीच जवाब देना आवश्यक है।गाजियाबाद में आयोजित पदयात्रा इसी अभियान का हिस्सा थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में परिवर्तन का अधिकार जनता के पास है और जनता अपने वोट के माध्यम से राजनीतिक दलों के भविष्य का फैसला करती है।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने गाजियाबाद में बनाए गए पूर्वांचल भवन और उत्तराखंड भवन की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों का उदाहरण भी दिया।योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद लोकतंत्र, आपातकाल और चुनावी व्यवस्था को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। जहां भाजपा कांग्रेस के ऐतिहासिक फैसलों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं विपक्ष वर्तमान चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जवाब मांग रहा है। ऐसे में लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और चुनावी निष्पक्षता का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना रह सकता है।
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