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उत्तर प्रदेश
556 अनुदानित मदरसों के छात्रावासों पर शिकायत, आठ नवंबर तक जवाब तलब
nidhi
17 Oct 2026 6:54 AM IST

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मदरसा छात्रावासों की होगी जांच
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अनुदानित मदरसों से जुड़े छात्रावासों में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए आठ नवंबर की समयसीमा निर्धारित की गई है। मामला राज्य के 556 अनुदानित मदरसों से संबंधित है। हालांकि, सभी संस्थानों में सुरक्षा उल्लंघन साबित होने का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है; शिकायत में अधिकतर के छात्रावास संचालन पर सवाल उठाए गए हैं।
बाराबंकी निवासी तलहा अंसारी की शिकायत में आवश्यक अनुमति, अनापत्ति प्रमाणपत्र, अग्निशमन संसाधन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी प्रमाणपत्र और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था का मुद्दा उठाया गया है। आयोग ने विभाग के अपर मुख्य सचिव और निदेशक से जवाब मांगा है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। विभाग के निदेशक शीलधर सिंह ने बताया कि जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट निर्धारित समय में भेजी जाएगी।
जांच में स्पष्ट होगी संस्थानवार स्थिति
इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कितने मदरसों में छात्रावास संचालित हैं और उनमें वास्तविक व्यवस्थाएं क्या हैं। शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का संस्थानवार सत्यापन होने के बाद ही कमियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अनुमति संबंधी दस्तावेज उपलब्ध होना और मौके पर सुविधाओं का काम करना, दोनों अलग पहलू हैं। इसलिए जांच रिपोर्ट का महत्व केवल प्रमाणपत्रों की सूची तक सीमित नहीं रहेगा। बच्चों के रहने की परिस्थितियां, सुरक्षा उपकरणों की स्थिति और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़े तथ्य भी मामले को समझने में महत्वपूर्ण होंगे।
बच्चों के छात्रावासों के लिए मौजूद हैं दिशा-निर्देश
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों के शैक्षणिक छात्रावासों के लिए नियामक दिशा-निर्देश प्रकाशित किए हैं। इनमें सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त रोशनी, हवा आने-जाने की व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाओं पर जोर दिया गया है। उम्र, लिंग और दिव्यांगता संबंधी जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी उल्लेख है। ये सामान्य दिशा-निर्देश बताते हैं कि छात्रावास का मूल्यांकन केवल रहने के लिए कमरे उपलब्ध होने से नहीं किया जा सकता। वहां बच्चों की सुरक्षा और रोजमर्रा की आवश्यकताओं की व्यवस्था भी जरूरी है।
अग्निशमन उपकरण के साथ तैयारी भी जरूरी
इन्हीं दिशा-निर्देशों में प्राथमिक उपचार किट और अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था का उल्लेख है। छात्रावास में आग से बचाव का सवाल बच्चों के सुरक्षित आवास से सीधे जुड़ा होता है। किसी उपकरण का मौजूद होना तभी उपयोगी है जब जरूरत के समय उसका इस्तेमाल संभव हो। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा में उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनकी कार्यशीलता देखना भी महत्वपूर्ण है। इसी तरह पानी के भंडारण की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि उससे बच्चों के लिए दुर्घटना का खतरा पैदा न हो।
पेयजल और स्वच्छता का मुद्दा भी अहम
साफ पानी तथा स्वच्छ शौचालय बच्चों की दैनिक जरूरत हैं। छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी इन सुविधाओं के लिए संस्थान की व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इसलिए शिकायत में पेयजल और साफ-सफाई का उल्लेख विशेष महत्व रखता है। संबंधित जांच में किसी सुविधा के अभाव का आरोप सही मिलने पर उसे सुधारने की स्पष्ट जरूरत होगी। वहीं, जिन संस्थानों में व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, उनकी वास्तविक स्थिति भी रिपोर्ट में सामने आनी चाहिए। इससे शिकायत, उपलब्ध दस्तावेज और मौके की परिस्थितियों के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सकेगा।
रिपोर्ट से तय होगा अगला कदम
फिलहाल मामले में जांच रिपोर्ट मांगे जाने की कार्रवाई सामने आई है। इसे सभी मदरसों को दोषी ठहराने या छात्रावास बंद करने के आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आगे की स्थिति विभागीय जवाब और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में यह जानना जरूरी होगा कि कमी कहां मिली, सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए और उनका पालन कैसे सुनिश्चित किया गया। अभिभावकों के लिए भी संस्थान की वास्तविक सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी उपयोगी होगी। आठ नवंबर तक मांगी गई रिपोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई का आधार बनेगी।
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