उत्तर प्रदेश

Sonbhadra केस में पलटा फैसला, फांसी पाए आरोपी को हाईकोर्ट ने किया बरी

Ratna Netam
17 July 2026 8:55 PM IST
Sonbhadra  केस में पलटा फैसला, फांसी पाए आरोपी को हाईकोर्ट ने किया बरी
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Prayagraj प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र के चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी अशोक शर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद अदालत ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई फांसी की सजा को रद्द करते हुए अशोक शर्मा को राहत प्रदान की।

मामला सोनभद्र जिले का है, जहां गर्भवती महिला सुनीता शर्मा और उसकी तीन वर्षीय पुत्री झलक की हत्या का आरोप अशोक शर्मा पर लगाया गया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अशोक शर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।

आरोपी की अपील पर सुनवाई न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने की। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विनय सरण और अतुल कुमार पांडे को न्याय मित्र नियुक्त किया था। दोनों अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष आरोपी के पक्ष में दलीलें पेश कीं।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभास हैं और उपलब्ध साक्ष्य आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पूरी तरह साबित नहीं कर पाया है। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए आरोपों का प्रमाण संदेह से परे होना जरूरी है। केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को सजा नहीं दी जा सकती।

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले में अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने अशोक शर्मा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया।

गौरतलब है कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद अशोक शर्मा को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसके चलते यह मामला काफी चर्चित रहा था। फांसी जैसी कठोर सजा को लेकर हाईकोर्ट में अपील की गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरोपी को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट का यह फैसला इस सिद्धांत को दोहराता है कि गंभीर से गंभीर अपराध के मामलों में भी अदालतें केवल ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही दोषसिद्धि करती हैं। यदि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहता है तो आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सोनभद्र के इस चर्चित मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी अशोक शर्मा को मामले में सभी आरोपों से मुक्त माना जाएगा।

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