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लखनऊ MLC चुनाव: ज्योतिषाचार्य की पत्नी को 300 वोट भी नहीं, सपा की जीत से BJP को झटका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की लखनऊ खंड स्नातक सीट पर हुए चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और निवर्तमान एमएलसी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह को 17,127 मतों से पराजित कर दिया। इस जीत के साथ समाजवादी पार्टी ने छह साल बाद इस महत्वपूर्ण सीट पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, इस चुनाव में एक और नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। जाने-माने ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी स्मिता मिश्रा भी चुनावी मैदान में थीं, लेकिन उन्हें 300 वोट भी नहीं मिल सके। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाली स्मिता मिश्रा का प्रदर्शन राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
कांति सिंह ने भाजपा उम्मीदवार को 17 हजार से अधिक वोटों से हराया
लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने शानदार जीत दर्ज की। नौवें और अंतिम चरण की मतगणना पूरी होने के बाद कांति सिंह को कुल 56,905 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा उम्मीदवार इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट मिले।
इस प्रकार समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार ने 17,127 मतों के अंतर से जीत हासिल की। मतगणना शुरू होने के बाद से ही कांति सिंह लगातार बढ़त बनाए हुए थीं। जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ी, दोनों उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर भी बढ़ता गया।
आठवें चरण तक कांति सिंह को 51,168 वोट और अवनीश कुमार सिंह को 36,313 मत मिले थे। अंतिम चरण में भी सपा उम्मीदवार ने बढ़त बनाए रखी और जीत दर्ज की।
ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी को नहीं मिले 300 वोट
लखनऊ स्नातक सीट के चुनाव में स्मिता मिश्रा का प्रदर्शन भी चर्चा में है। स्मिता मिश्रा प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा की पत्नी हैं। उन्होंने इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमाई थी।
हालांकि, चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्मिता मिश्रा को 300 से भी कम वोट मिले। फिलहाल उनके मतों का सटीक आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध जानकारी से पुष्ट नहीं हो सका है।
स्मिता मिश्रा की चुनावी हार इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उनके पति आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा ज्योतिष और भविष्यवाणियों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, उनकी ओर से पत्नी की चुनावी जीत या हार को लेकर कोई भविष्यवाणी किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर स्मिता मिश्रा मतदाताओं के बीच अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सकीं।
कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय उतरी थीं स्मिता मिश्रा
रिपोर्टों के मुताबिक स्मिता मिश्रा ने चुनाव से पहले कांग्रेस की सदस्यता ली थी। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर मिल सकता है।
इस बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में नेतृत्व परिवर्तन हुआ। अजय राय की जगह आराधना मिश्रा 'मोना' को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, कांग्रेस ने स्मिता मिश्रा को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया।
टिकट नहीं मिलने के बाद स्मिता मिश्रा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। लेकिन चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए।
यह स्पष्ट नहीं है कि संगठनात्मक बदलाव का उनके टिकट नहीं मिलने से कोई सीधा संबंध था या नहीं। इस संबंध में पार्टी की ओर से पुष्ट कारण सामने नहीं आया है।
2014 में कांति सिंह ने निर्दलीय जीता था चुनाव
समाजवादी पार्टी की विजेता उम्मीदवार कांति सिंह का लखनऊ स्नातक सीट से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है। वर्ष 2014 में उन्होंने इसी निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी।
उस चुनाव में उन्होंने अवनीश कुमार सिंह को 6,403 मतों से हराया था। इसके बाद वर्ष 2020 में राजनीतिक समीकरण बदले और भाजपा उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह ने कांति सिंह को पराजित कर सीट पर कब्जा कर लिया।
दिलचस्प बात यह रही कि 2020 में अवनीश कुमार सिंह ने भी कांति सिंह को 6,403 मतों के अंतर से हराया था।
अब वर्ष 2026 में कांति सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरीं और पिछली हार के मुकाबले कहीं बड़े मतांतर से जीत हासिल की।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा को मिला उत्साह
लखनऊ स्नातक सीट पर जीत को समाजवादी पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद चुनाव में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार प्रदेश में पार्टी संगठन को मजबूत करने और विभिन्न मतदाता वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं।
लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार की हार ने पार्टी की स्थानीय चुनावी रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता वर्ग विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसलिए इस जीत को विधानसभा चुनाव के संभावित परिणामों से सीधे जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर काम करने का भरोसा
चुनाव जीतने के बाद कांति सिंह ने युवाओं और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने, करियर काउंसलिंग की व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षा के बेहतर वातावरण पर ध्यान देने का भरोसा दिलाया।
कांति सिंह ने स्नातक बेरोजगारों तथा वित्तविहीन शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को भी महत्वपूर्ण बताया।
उनके पति और प्रतापगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. एसपी सिंह ने मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
लखनऊ स्नातक सीट के परिणाम ने बदले राजनीतिक समीकरण
लखनऊ खंड स्नातक सीट के नतीजे में एक ओर समाजवादी पार्टी को सफलता मिली, वहीं भाजपा को अपनी पिछली जीती हुई सीट गंवानी पड़ी।
दूसरी ओर प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य की पत्नी स्मिता मिश्रा का 300 से कम वोट हासिल करना भी इस चुनाव की चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया।
कुल मिलाकर, लखनऊ स्नातक सीट के परिणाम ने एक बार फिर साबित किया कि चुनावी मुकाबले में उम्मीदवार की पहचान के साथ मतदाताओं से संपर्क, संगठनात्मक तैयारी और स्थानीय मुद्दों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सपा की कांति सिंह अब इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधान परिषद में करेंगी, जबकि भाजपा और अन्य उम्मीदवारों के लिए यह परिणाम अपनी चुनावी तैयारियों की समीक्षा का अवसर है।





