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उत्तर प्रदेश
सांप काटने की कहानी पर पुलिस को हुआ शक, पोस्टमार्टम ने खोली हत्या की पोल
nidhi
17 Oct 2026 7:01 AM IST

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पत्नी और प्रेमी को मिली फांसी की सजा
मेरठ: मौत को सांप के काटने का नतीजा बताकर अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही थी, लेकिन चेहरे और गले पर मौजूद निशानों ने पुलिस का ध्यान खींच लिया। पोस्टमार्टम कराने के फैसले ने मामले की दिशा बदल दी और सामने आया कि अमित कश्यप की मौत गला दबाने से हुई थी। मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव के इसी चर्चित हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अमित की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया। दोनों को सात अक्टूबर को दोषी ठहराया गया था।
अंतिम संस्कार से पहले पुलिस को हुआ संदेह
मामले की विवेचक और तत्कालीन बहसूमा थाना प्रभारी इंदू वर्मा के मुताबिक, ग्रामीणों की सूचना पर वह गांव पहुंची थीं। परिवार अमित की मौत पर विलाप कर रहा था और अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान उन्हें नाक के पास चोट के निशान दिखाई दिए। शरीर से कपड़ा हटाकर देखने पर गले पर भी निशान मिले। उन्होंने पोस्टमार्टम कराने को कहा। शुरुआत में परिजन तैयार नहीं हुए। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में परिवार मान गया, लेकिन रविता विरोध करती रही। इसके बावजूद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदल दी जांच
दो दिन बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई। जिस मौत को सर्पदंश बताया जा रहा था, उसकी वजह दम घुटना निकली। चिकित्सकीय निष्कर्षों के बाद हत्या के पहलू से जांच आगे बढ़ी। पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों, संबंधित लोगों की भूमिका और फोन पर हुई बातचीत के विवरण को खंगाला। थाना प्रभारी के सामने मिले शुरुआती निशान इस तरह मामले की जांच का महत्वपूर्ण आधार बने। इसके बाद जुटाए गए साक्ष्य अदालत तक पहुंचे और दोनों की भूमिका पर सुनवाई हुई।
बिस्तर के पास छोड़ा गया था जिंदा सांप
अभियोजन के अनुसार, 13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित अपने बिस्तर पर मृत मिले थे। उनके शरीर के पास एक जिंदा घोड़ापछाड़ सांप था। रविता ने परिवार को बताया कि उनकी मौत सांप के काटने से हुई है। शुरुआत में इस बात पर विश्वास कर लिया गया। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद सांप रखकर मौत को दूसरी वजह देने की कोशिश की गई थी। बरामद सांप जहरीला नहीं था। इस तथ्य और पोस्टमार्टम के निष्कर्ष ने सर्पदंश की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
साथ काम करता था अमरदीप
अमित टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करते थे। अमरदीप भी उनके साथ काम करता था और घर आता-जाता था। अभियोजन का मामला था कि इसी दौरान अमरदीप और रविता के बीच संबंध बने। अमित को जानकारी होने और विरोध करने के बाद दोनों ने उनकी हत्या की साजिश रची। अदालत ने गवाहों तथा प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करके दोनों को दोषी ठहराया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने सजा सुनाई। मामले की सुनवाई में अभियोजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए।
फोन रिकॉर्ड और गवाहियां बनीं अहम कड़ी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के बाद रविता और अमरदीप के बीच बार-बार बातचीत हुई थी। फोन रिकॉर्ड को दूसरे साक्ष्यों के साथ अदालत में प्रस्तुत किया गया। अमित की मां और भाई की गवाही भी महत्वपूर्ण रही। सांप उपलब्ध कराने से संबंधित गवाहों के बयान से यह जानकारी सामने आई कि पूजा का बहाना बनाकर सांप लिया गया था। अमित के भाई मोनू ने 16 अप्रैल 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद 26 जून 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी
सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों दोषियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जोड़ा गया। रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों का उल्लेख किया, जबकि अमरदीप ने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का हवाला दिया। अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया। फैसला सुनने पहुंचीं अमित की मां मुनेश देवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें बेटे के लिए न्याय मिला है। साथ ही उन्होंने बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी खुद संभालने की बात कही। परिवार के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आया महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है।
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