उत्तराखंड

उत्तराखंड के मदरसों में बुनियादी सुविधाओं का संकट, 227 बंद और 19 सील

Kavita2
12 Oct 2026 9:32 AM IST
उत्तराखंड के मदरसों में बुनियादी सुविधाओं का संकट, 227 बंद और 19 सील
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देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों की नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद बच्चों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कई सवाल अब भी बने हुए हैं। नई व्यवस्था लागू होने के सवा तीन महीने बाद भी मदरसों में प्रधानमंत्री पोषण योजना (पीएम पोषण योजना) के तहत भोजन उपलब्ध कराने को लेकर स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है। वहीं, कई मदरसों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। कक्षा आठ तक धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार होने के बावजूद उसे लागू नहीं किया जा सका है।

धार्मिक शिक्षा की किताबें सरकार उपलब्ध कराएगी या मदरसों को स्वयं उनकी व्यवस्था करनी होगी, इस संबंध में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में पंजीकृत 452 मदरसों में से 227 के खुद बंद हो जाने और 19 मदरसों को सील किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों की मौजूदा स्थिति और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित हो गया है।

भोजन योजना को लेकर स्पष्ट आदेश का इंतजार

मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूलों की तरह पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए पीएम पोषण योजना महत्वपूर्ण है। हालांकि, उत्तराखंड में नई व्यवस्था लागू होने के सवा तीन महीने बाद भी मदरसों में इस योजना के तहत भोजन देने को लेकर स्पष्ट आदेश नहीं हुआ है।

भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ कब और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। संबंधित आदेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मदरसों में योजना को किस प्रकार लागू किया जाएगा और इसकी जिम्मेदारी किन स्तरों पर तय होगी।

बच्चों को नियमित शिक्षा के साथ पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी शैक्षणिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में भोजन योजना पर निर्णय में देरी से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। फिलहाल योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट निर्देश का इंतजार बना हुआ है।

कई मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें अधूरी

नई व्यवस्था के तहत मदरसों में शैक्षणिक सामग्री की उपलब्धता भी एक चुनौती बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, कई मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। पाठ्यपुस्तकों की कमी का असर पढ़ाई की नियमित प्रक्रिया पर पड़ सकता है, क्योंकि विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन करने के लिए किताबों की जरूरत होती है।

किताबें अधूरी होने की स्थिति में विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने पढ़ाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की चुनौती आती है। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण पहलू है।

हालांकि, कितने मदरसों में किताबें उपलब्ध नहीं हैं और कितनी किताबों की कमी है, इसका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पाठ्यपुस्तकों की कमी का दायरा कितना बड़ा है।

धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार, लेकिन लागू नहीं

मदरसों में धार्मिक शिक्षा को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। कक्षा आठ तक धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार किए जाने की जानकारी है, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा, धार्मिक शिक्षा से संबंधित किताबें सरकार उपलब्ध कराएगी या नहीं, इसे लेकर भी स्पष्टता नहीं है।

पाठ्यक्रम तैयार होना और उसे वास्तविक रूप से पढ़ाई में लागू करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। पाठ्यक्रम के साथ किताबों की उपलब्धता, शिक्षकों को आवश्यक सामग्री और पढ़ाई की रूपरेखा स्पष्ट होना भी जरूरी है। जब तक इन विषयों पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक मदरसों में धार्मिक शिक्षा की निर्धारित व्यवस्था को जमीन पर उतारने में कठिनाई बनी रह सकती है।

धार्मिक शिक्षा से जुड़ी किताबों की उपलब्धता पर निर्णय नहीं होने से मदरसों के सामने यह सवाल भी है कि विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए जरूरी सामग्री कैसे मिलेगी। सरकार की ओर से किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी या किसी अन्य माध्यम से उनका इंतजाम किया जाएगा, इस पर अभी स्पष्ट निर्देश सामने नहीं आए हैं।

452 पंजीकृत मदरसों में से 227 खुद बंद

उत्तराखंड में कुल 452 मदरसे पंजीकृत बताए गए हैं। इनमें से 227 मदरसे खुद बंद हो चुके हैं, जबकि 19 मदरसों को सील किया जा चुका है। इन आंकड़ों से प्रदेश में मदरसों की मौजूदा स्थिति का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि 227 मदरसों के बंद होने के पीछे कौन-कौन से कारण रहे हैं। इसी तरह, जिन 19 मदरसों को सील किया गया है, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के विस्तृत कारणों का उल्लेख भी नहीं है। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर सभी मदरसों के बंद होने या सील किए जाने की वजह एक समान मानना उचित नहीं होगा।

मदरसों की संख्या और उनकी स्थिति के साथ बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। जो मदरसे संचालित हैं, वहां पढ़ने वाले बच्चों को पाठ्यपुस्तकें, भोजन और निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत है।

नई व्यवस्था के क्रियान्वयन पर उठ रहे सवाल

उत्तराखंड में मदरसों के लिए नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद भोजन योजना, किताबों और धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम से जुड़े विषयों पर स्पष्टता नहीं होने से इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। व्यवस्था का उद्देश्य तभी प्रभावी रूप से जमीन पर दिखाई देगा, जब उससे संबंधित निर्देशों के साथ आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध हों।

पीएम पोषण योजना के तहत भोजन देने पर स्पष्ट आदेश, एनसीईआरटी की किताबों की उपलब्धता और धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लागू करने जैसे मुद्दों पर निर्णय महत्वपूर्ण हैं। इन विषयों पर स्पष्टता मिलने से मदरसों के संचालकों और शिक्षकों को भी अपनी शैक्षणिक गतिविधियों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत बच्चों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े लंबित सवालों का समाधान करने की है। भोजन योजना का संचालन कब शुरू होगा, किताबों की कमी कैसे दूर की जाएगी और धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को कब लागू किया जाएगा, इन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।

प्रदेश में 452 पंजीकृत मदरसों में से 227 के बंद होने और 19 के सील किए जाने के बीच संचालित संस्थानों की स्थिति पर भी नजर बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर कब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है, ताकि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान हो सके।

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