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रसोई पर महंगाई
देहरादून: जन्माष्टमी से ठीक पहले सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के रसोई बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। प्याज के बाद अब पहाड़ी आलू, मटर, लहसुन, फूलगोभी और नींबू जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। बारिश और परिवहन संबंधी परेशानियों के कारण सब्जियों की आवक प्रभावित होने का असर फुटकर बाजार में दिखाई दे रहा है।
बुधवार को देहरादून के फुटकर बाजार में प्याज करीब 50 से 55 रुपये प्रति किलो तक बिकने की रिपोर्ट है। वहीं तुमड़ी यानी पहाड़ी आलू 56 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। सबसे ज्यादा परेशानी मटर, लहसुन और नींबू की कीमतों ने बढ़ाई है।
मटर 180 तो लहसुन 200 रुपये तक
फुटकर बाजार में मटर की कीमत करीब 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। लहसुन 180 से 200 रुपये प्रति किलो के आसपास बेचा गया। हिमाचली फूलगोभी भी करीब 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। नींबू के भाव में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली और इसकी फुटकर कीमत करीब 210 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की गई। त्योहार से ठीक पहले एक साथ कई सब्जियों के महंगे होने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।
पहाड़ी आलू ने भी दिया झटका
पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले तुमड़ी आलू की मांग बनी हुई है लेकिन इसकी कीमत भी बढ़कर 56 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। सामान्य आलू की तुलना में पहाड़ी आलू की कीमत अधिक होने के कारण कई ग्राहक अब सीमित मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं। प्याज की कीमत भी अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। फुटकर बाजार में प्याज करीब 50 से 55 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। ऐसे में आलू और प्याज जैसी रसोई की सबसे सामान्य चीजों की कीमत बढ़ने से परिवारों के मासिक खर्च पर सीधा असर पड़ रहा है।
बारिश से प्रभावित हो रही आवक
सब्जियों की कीमत बढ़ने के पीछे प्रमुख कारणों में बारिश और आवक में आई परेशानी को माना जा रहा है। निरंजनपुर स्थित नवीन सब्जी मंडी के सचिव विजय थपलियाल के मुताबिक आवक प्रभावित होने का असर सब्जियों के दाम पर पड़ रहा है। बारिश और परिवहन से जुड़ी समस्याएं भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़कें बाधित होने और परिवहन धीमा पड़ने का असर जल्दी खराब होने वाली सब्जियों की सप्लाई पर ज्यादा पड़ता है। बाजार तक पर्याप्त मात्रा में माल नहीं पहुंचने पर फुटकर कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
मंडी और फुटकर बाजार के भाव में अंतर
देहरादून में मंडी और फुटकर बाजार की कीमतों में अंतर भी देखने को मिल रहा है। मंडी में कुछ सब्जियां अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हैं लेकिन फुटकर बाजार तक पहुंचते-पहुंचते इनके दाम बढ़ जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार मंडी में करेला करीब 30 रुपये और कद्दू 25 रुपये प्रति किलो तक था। वहीं खुले बाजार में करेला करीब 50 और कद्दू 40 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा था शिमला मिर्च भी मंडी में करीब 45 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध थी जबकि फुटकर बाजार में इसके लिए ग्राहकों को 60 से 80 रुपये प्रति किलो तक चुकाने पड़ रहे थे।
जन्माष्टमी से पहले बढ़ी परेशानी
चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी होने के कारण बाजारों में खरीदारी बढ़ रही है। त्योहार के दौरान फल, सब्जियों और दूसरी खाद्य वस्तुओं की मांग भी बढ़ती है। ऐसे समय में सब्जियों की कीमतों में आई तेजी ने परिवारों का बजट और मुश्किल कर दिया है।
व्रत और त्योहार के कारण आलू, फल और दूसरी खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में फुटकर कीमतें कम नहीं होने पर उपभोक्ताओं को त्योहार की खरीदारी के लिए अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
आम लोगों को राहत का इंतजार
लगातार बढ़ती कीमतों के बीच लोगों को अब सब्जियों की आवक सामान्य होने का इंतजार है। बारिश और परिवहन की स्थिति सुधरने पर बाजार में सप्लाई बेहतर होने से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल प्याज के बाद पहाड़ी आलू, मटर और लहसुन की महंगाई ने देहरादून के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहार से पहले सब्जियों के ऊंचे भाव ने रसोई का हिसाब बिगाड़ दिया है और आम उपभोक्ता कीमतों में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।
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