
खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार, 24 सितंबर को ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र के हल्दीघेरा में सात करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आधुनिक गौशाला का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इसे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए कहा कि लंबे समय से स्थानीय लोगों को जिस गौशाला की प्रतीक्षा थी, वह अब पूरी हुई है। करीब आठ एकड़ में बनी इस गौशाला में लगभग दो हजार गोवंश को रखने की क्षमता बताई गई है।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह केवल एक गौशाला का उद्घाटन नहीं है, बल्कि निराश्रित और बेसहारा गोवंश को सुरक्षित और सम्मानजनक आश्रय देने के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गौशाला शुरू होने से गोवंश को आश्रय, आहार और संरक्षण मिलने के साथ स्थानीय किसानों और नागरिकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए बड़ी समस्या बने थे बेसहारा गोवंश
खटीमा क्षेत्र में लंबे समय से खुले में घूमने वाले बेसहारा गोवंश किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए थे। खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के कारण किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ते थे।
सड़कों और हाईवे पर घूमने वाले पशुओं से यातायात भी प्रभावित होता था और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए हल्दीघेरा में बड़े स्तर पर गौशाला विकसित करने की योजना पर काम किया गया। स्थानीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि गौशाला के संचालन से बेसहारा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने में मदद मिलेगी और किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।
करीब आठ एकड़ क्षेत्र में बनी गौशाला
हल्दीघेरा में तैयार की गई गौशाला करीब आठ एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसमें लगभग दो हजार गोवंश को रखने की क्षमता है। परियोजना पर सात करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इसे क्षेत्र में गोवंश संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया गया है।
गौशाला में पशुओं को रखने के साथ उनके भोजन, पानी और देखभाल से संबंधित सुविधाओं की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया है। बड़ी संख्या में बेसहारा गोवंश को एक ही स्थान पर व्यवस्थित तरीके से रखने की क्षमता के कारण यह क्षेत्र की प्रमुख गौशालाओं में शामिल हो गई है।
धामी बोले- लंबे समय से था इस दिन का इंतजार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समारोह में कहा कि यह उनके लिए सामान्य दिन नहीं, बल्कि विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से इस गौशाला की प्रतीक्षा कर रहे थे और अब उनका सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री ने परियोजना को पशु संरक्षण के साथ किसानों और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं के समाधान से भी जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निराश्रित गोवंश को खुले में छोड़ने के बजाय उनके लिए व्यवस्थित आश्रय की आवश्यकता है। गौशाला के माध्यम से पशुओं को सुरक्षित स्थान मिलने के साथ उनकी नियमित देखभाल की व्यवस्था भी हो सकेगी।
सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा होगा कम
बेसहारा पशुओं की समस्या केवल किसानों के खेतों तक सीमित नहीं है। सड़क और हाईवे पर पशुओं के अचानक आ जाने से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाओं को सड़क सुरक्षा के लिए चुनौती माना जाता रहा है।
हल्दीघेरा गौशाला में निराश्रित गोवंश को रखने से सड़कों पर उनकी संख्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी राहत मिल सकती है।
आधुनिक गौशालाओं को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने गौशालाओं को आधुनिक बनाने और गोवंश आधारित कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने गौशालाओं को केवल पशुओं के आश्रय स्थल तक सीमित न रखते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक खेती से जोड़ने की बात कही।
गोबर से जैविक खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियों के माध्यम से गौशालाओं को अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है। हालांकि हल्दीघेरा गौशाला में ऐसी गतिविधियों का स्वरूप इसके संचालन की आगामी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
गोवंश को मिलेगा आश्रय और संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौसेवा केवल परंपरा का विषय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और कर्तव्य से भी जुड़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई गौशाला के संचालन से स्थानीय नागरिकों और किसानों को राहत मिलने के साथ निराश्रित पशुओं को भोजन, आश्रय और संरक्षण मिलेगा।
क्षेत्र में बेसहारा पशुओं को व्यवस्थित रूप से गौशाला तक पहुंचाने और उनकी देखभाल की व्यवस्था इस परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली गौशाला के संचालन में पशुओं के लिए चारे, पानी, चिकित्सा सुविधा और साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था भी जरूरी होगी।
किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
खटीमा और आसपास के कृषि क्षेत्रों में बेसहारा पशुओं से फसल बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है। कई किसान रात के समय भी खेतों की निगरानी करने को मजबूर होते हैं। नई गौशाला के पूरी क्षमता से संचालित होने पर ऐसे पशुओं को खेतों और सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री धामी ने भी परियोजना को किसानों की समस्या के समाधान से जोड़ते हुए कहा कि गौशाला शुरू होने से स्थानीय नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हल्दीघेरा में सात करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार इस आधुनिक गौशाला का वास्तविक प्रभाव अब उसके नियमित संचालन, पशुओं की देखभाल और बेसहारा गोवंश को वहां पहुंचाने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। करीब दो हजार पशुओं की क्षमता वाली यह परियोजना खटीमा क्षेत्र में गोवंश संरक्षण के साथ किसानों और सड़क उपयोगकर्ताओं की लंबे समय से चली आ रही समस्या को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराती है।





