उत्तराखंड

कांवड़ यात्रा में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक

Kavita2
18 July 2026 9:50 AM IST
कांवड़ यात्रा में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक
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देहरादून : इस वर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर आयोजित अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक में उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

बैठक में कांवड़ यात्रा के दौरान संभावित भीड़, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, मार्ग परिवर्तन और विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने यात्रा के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर विस्तृत योजना तैयार करने पर विचार-विमर्श किया।

अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना है, जिस पर तेज गति से यातायात संचालित होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल और अन्य माध्यमों से हरिद्वार तथा आसपास के क्षेत्रों की ओर जाते हैं। ऐसे में एक्सप्रेसवे पर श्रद्धालुओं की आवाजाही से दुर्घटना और यातायात बाधित होने की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

मुख्य सचिव ने बैठक में संबंधित राज्यों के अधिकारियों से कहा कि प्रतिबंध से जुड़ी जानकारी श्रद्धालुओं और आम यात्रियों तक समय से पहुंचाई जाए, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि वैकल्पिक मार्गों और यातायात व्यवस्था की जानकारी पहले से साझा की जाए, जिससे श्रद्धालु निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें।

कांवड़ यात्रा उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक है। हर वर्ष लाखों की संख्या में शिवभक्त हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य धार्मिक स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों की ओर लौटते हैं। यात्रा के दौरान उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में भी यातायात का दबाव बढ़ जाता है।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। पुलिस, परिवहन विभाग, स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत रखने पर जोर दिया गया है।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से पूरी कर ली जाएं। इसमें पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रकाश व्यवस्था, विश्राम स्थल और सुरक्षा इंतजाम शामिल हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी तैयारियों की समीक्षा कर ली जाए।

दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। इसके लिए प्रवेश बिंदुओं पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

प्रशासन का मानना है कि समय रहते योजना तैयार करने और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने से कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात और सुरक्षा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय और स्पष्ट रणनीति बनाना आवश्यक हो जाता है। एक्सप्रेसवे जैसे तेज गति वाले मार्गों पर पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकना दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं इस प्रकार की जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और आम यातायात भी प्रभावित न हो।

अब दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि इस निर्णय को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए और श्रद्धालुओं को पहले से सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन को उम्मीद है कि बेहतर समन्वय और समयबद्ध तैयारी से कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराई जा सकेगी।

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