कुंभ मेले की तैयारियां तेज, 600 पुलिसकर्मियों को मिला प्रशिक्षण

हरिद्वार: कुंभ मेला की तैयारियों के तहत सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, हरिद्वार में आयोजित प्रशिक्षण के 11वें चरण में 600 पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रो. नरेश चौधरी ने कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराने, भीड़ नियंत्रण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के गुर सिखाए।
प्रशिक्षण में साधु-संतों और अखाड़ों के अमृत स्नान (शाही स्नान), पेशवाई की परंपराओं और व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। साथ ही स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और स्वयंसेवी सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पिछली घटनाओं से सबक लेने की जरूरत
डॉ. नरेश चौधरी ने 1986 और 1998 के कुंभ मेलों, 1996 के सोमवती स्नान, 2004 के अर्द्धकुंभ, 2010 के कुंभ मेले तथा वर्ष 2011 में शांतिकुंज के शताब्दी समारोह के दौरान हुई भगदड़ की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुंभ ड्यूटी में तैनात प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को इन घटनाओं की जमीनी परिस्थितियों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि सतर्कता बरतकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2004 के अर्द्धकुंभ मेले की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद यह पहला बड़ा स्नान पर्व था। उस समय पुलिस बल में बड़ी संख्या में नए और अनुभवहीन कर्मचारी तैनात थे। स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय की कमी तथा अफवाहों के चलते स्थिति बिगड़ी और हरिद्वार में पहली बार कर्फ्यू लगाना पड़ा।
स्थानीय समन्वय से व्यवस्थाओं में हुआ सुधार
डॉ. चौधरी ने कहा कि पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए बाद के आयोजनों में संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्थानीय नागरिकों के साथ समन्वय बढ़ाया। उनके सुझावों पर अमल करने से चुनौतीपूर्ण स्नान पर्वों को सुचारु रूप से संपन्न कराने में मदद मिली। उन्होंने करीब चार दशकों के अनुभव साझा करते हुए कुंभ, अर्द्धकुंभ, सोमवती स्नान, कांवड़ मेला और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान निभाई गई जिम्मेदारियों के बारे में भी प्रशिक्षणार्थियों को जानकारी दी।
डॉ. चौधरी ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और कुंभ मेला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों को जमीनी परिस्थितियों को समझने और संभावित चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है। इसका लाभ कुंभ जैसे विशाल आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में मिलेगा।





