उत्तराखंड

बढ़ती गर्मी से साल में 90 घंटे नींद का नुकसान

Saba Naaz
16 July 2026 9:16 PM IST
बढ़ती गर्मी से साल में 90 घंटे नींद का नुकसान
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DEHRADUN: जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब केवल बढ़ती गर्मी और मौसम में बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि भारत में बढ़ते रात्रिकालीन तापमान यानी गर्म रातों के कारण लोगों की नींद पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई भारतीय शहरों में लोग हर साल 70 से 90 घंटे तक की नींद खो रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर तापमान बढ़ने की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में गर्म रातें सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

अमेरिकी वैज्ञानिक संस्था 'क्लाइमेट सेंट्रल' की ओर से किए गए अध्ययन में भारत के 107 शहरों को शामिल किया गया। इस शोध में दुनिया के 1338 शहरों का विश्लेषण किया गया और करीब 47 हजार लोगों के 70 लाख से अधिक नींद रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि भारत के कई बड़े शहरों में रात के तापमान में बढ़ोतरी के कारण लोगों की नींद लगातार प्रभावित हो रही है।

अध्ययन के अनुसार, चेन्नई में लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां औसतन हर व्यक्ति साल में करीब 93 घंटे की नींद खो रहा है। इसके बाद मुंबई में करीब 84 घंटे और कोलकाता में लगभग 80 घंटे की नींद कम होने का अनुमान लगाया गया है। उत्तर भारत के शहरों में भी गर्म रातों का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के 11 शहरों में लोग औसतन हर साल करीब 69 घंटे की नींद गंवा रहे हैं। इसमें लगभग पांच घंटे का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से बताया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रात के समय भी तापमान अधिक रहने से शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा होने का मौका नहीं मिलता। सामान्य स्थिति में सोते समय शरीर का तापमान थोड़ा कम होता है, जिससे गहरी और आरामदायक नींद आती है। लेकिन जब रातें ज्यादा गर्म होती हैं तो शरीर अपना तापमान नियंत्रित नहीं कर पाता और बार-बार नींद टूटने लगती है।

गर्मी के साथ अगर वातावरण में नमी भी ज्यादा हो तो समस्या और बढ़ जाती है। पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर अतिरिक्त गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता। यही कारण है कि कई लोग पंखा या एयर कंडीशनर चलाने के बावजूद रात में बेचैनी महसूस करते हैं और उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती।

विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की कमी को केवल थकान की समस्या समझना गलत है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. जया नवानी के अनुसार, लगातार कम नींद लेने से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मानसिक तनाव और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा नींद पूरी न होने से व्यक्ति की कार्यक्षमता, याददाश्त और एकाग्रता पर भी असर पड़ता है। खासतौर पर गर्मी के मौसम में लगातार खराब नींद लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान से निपटने के लिए शहरों की योजना में बदलाव जरूरी है। कंक्रीट से भरे शहरों में गर्मी ज्यादा महसूस होती है क्योंकि इमारतें और सड़कें दिनभर की गर्मी को रात में भी छोड़ती रहती हैं। ऐसे में शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाना, पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना और भवनों को तापमान अनुकूल डिजाइन के साथ तैयार करना जरूरी हो गया है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि शहरों में रहने वाले लोग गांवों की तुलना में ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इसका कारण शहरी क्षेत्रों में बढ़ता निर्माण, कम हरियाली और गर्मी को रोकने वाली संरचनाएं हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्म रातें अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गई हैं, बल्कि यह लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में तापमान नियंत्रण और बेहतर शहरी नियोजन पर ध्यान नहीं दिया गया तो नींद से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए जलवायु परिवर्तन से निपटना अब पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हो गया है।

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