
धराली। उत्तराखंड के धराली में पांच अगस्त 2025 को खीरगंगा में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में धराली स्थित कल्पकेदार मंदिर भी मलबे में दब गया था। अब मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए ग्रामीणों ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार से धार्मिक अनुष्ठान के साथ खुदाई शुरू कर दी है। खुदाई से पहले पूजन और हवन किया गया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस प्रयास से मंदिर को फिर से सामने लाने का रास्ता खुलेगा।
कल्पकेदार मंदिर धराली क्षेत्र के धार्मिक महत्व से जुड़ा हुआ है। बाढ़ के बाद मंदिर के मलबे में दब जाने से स्थानीय लोगों की आस्था भी इससे जुड़ी रही है। ग्रामीण लंबे समय से मंदिर को मलबे से बाहर निकालने की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब नवरात्र के पहले दिन पूजन-हवन के साथ खुदाई शुरू होने से इस काम की शुरुआत हो गई है।
इस खुदाई के पीछे धार्मिक मान्यता और ग्रामीणों की सामूहिक आस्था भी जुड़ी हुई है। आपदा के एक साल पूरे होने पर ग्रामीणों ने इसी साल पांच अगस्त को विशेष पूजा का आयोजन किया था। इस पूजा के दौरान उन्होंने क्षेत्र के आराध्य समेश्वर देवता से कल्पकेदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए उचित दिन बताने की प्रार्थना की थी।
समेश्वर देवता से मांगा था खुदाई का दिन
धराली आपदा के एक वर्ष पूरे होने पर पांच अगस्त को ग्रामीणों ने पूजा आयोजित की थी। इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र के आराध्य समेश्वर देवता से प्रार्थना की कि कल्पकेदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालने का काम कब शुरू किया जाए। ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार, समेश्वर देवता ने उन्हें शारदीय नवरात्र के पहले दिन से यह काम शुरू करने का संकेत दिया था।
इसके बाद ग्रामीणों ने तय दिन पर मंदिर को मलबे से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की। रविवार को नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान से पूजन और हवन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद खुदाई का काम शुरू हुआ।
स्थानीय लोगों के लिए यह केवल मलबा हटाने का काम नहीं है, बल्कि मंदिर से जुड़ी आस्था और क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को फिर से सामने लाने का प्रयास भी है। इसी कारण खुदाई की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठान के साथ की गई।
पांच अगस्त 2025 की बाढ़ में दब गया था मंदिर
धराली में पांच अगस्त 2025 को खीरगंगा में आई बाढ़ ने इलाके को बुरी तरह प्रभावित किया था। इस आपदा के दौरान बड़ी मात्रा में मलबा आया था, जिसकी चपेट में कल्पकेदार मंदिर भी आ गया। मंदिर मलबे में दब गया और उसे बाहर निकालने की चुनौती सामने आई।
आपदा के बाद से मंदिर को फिर से सामने लाने का विषय स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए अब ग्रामीणों ने स्वयं पहल की है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन शुरू हुई खुदाई इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
मंदिर के मलबे में दबने के बाद से उसके आसपास की स्थिति और उसे निकालने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों की निगाहें बनी हुई थीं। अब धार्मिक अनुष्ठान के साथ खुदाई शुरू होने से इस कार्य को आगे बढ़ाने की उम्मीद जगी है।
पूजन और हवन के बाद शुरू हुई खुदाई
रविवार को नवरात्र के पहले दिन ग्रामीणों ने पहले पूजन और हवन किया। इसके बाद कल्पकेदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए खुदाई शुरू की गई। इस पूरी प्रक्रिया में धार्मिक आस्था को विशेष महत्व दिया गया।
ग्रामीणों ने पांच अगस्त को आयोजित पूजा के दौरान समेश्वर देवता से जिस दिन की प्रार्थना की थी, उसी दिन से काम शुरू किया गया। उनकी मान्यता के अनुसार, देवता ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन को इसके लिए निर्धारित किया था। इसी विश्वास के आधार पर खुदाई की शुरुआत की गई।
हालांकि, मंदिर को पूरी तरह मलबे से बाहर निकालने में कितना समय लगेगा, इस बारे में अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। खुदाई के दौरान मलबे की स्थिति और मंदिर के वास्तविक स्वरूप का पता चलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।
मंदिर को फिर सामने लाने की उम्मीद
धराली के ग्रामीणों के लिए कल्पकेदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालना एक महत्वपूर्ण प्रयास है। पांच अगस्त 2025 की बाढ़ के बाद मंदिर के दब जाने से जुड़ी स्मृतियां अब भी इस इलाके के लोगों के साथ हैं। ऐसे में नवरात्र के पहले दिन धार्मिक अनुष्ठान के साथ खुदाई की शुरुआत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पहल में ग्रामीणों की आस्था और सामूहिक प्रयास दोनों की भूमिका है। आपदा के एक साल पूरे होने पर आयोजित पूजा के दौरान दिन तय करने की प्रार्थना की गई थी। ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार, समेश्वर देवता से मिले संकेत के बाद अब काम शुरू कर दिया गया है।
फिलहाल खुदाई का कार्य शुरू हो चुका है। अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मलबे के भीतर दबे कल्पकेदार मंदिर को किस तरह बाहर निकाला जा सकता है और इस प्रक्रिया में मंदिर की वास्तविक स्थिति कैसी सामने आती है।





