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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद दर्दनाक हादसा, गंगा नदी में डूबने से भाजपा नेता की मौत, इलाके में शोक

हुगली। पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में दुर्गा पूजा विसर्जन के बाद एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। भद्रेश्वर इलाके में गंगा नदी से देवी दुर्गा की प्रतिमाओं के ढांचे निकालने के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय नेता की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान 61 वर्षीय गौरी साहानी के रूप में हुई है। वह भद्रेश्वर क्षेत्र में भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। घटना बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 की रात श्रीमानी घाट के पास हुई। बताया जा रहा है कि प्रतिमा विसर्जन के बाद गौरी साहानी नदी में उतरे थे, लेकिन अचानक गहरे पानी में चले जाने के कारण डूबने लगे। स्थानीय लोगों ने उन्हें पानी से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है।
प्रतिमा विसर्जन के बाद गंगा नदी में उतरे थे भाजपा नेता
जानकारी के अनुसार, बुधवार को हुगली जिले में दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था।
विसर्जन संपन्न होने के बाद कई स्थानों पर प्रतिमाओं के बांस और लकड़ी से बने ढांचे नदी से बाहर निकालने का काम किया जा रहा था।
इसी दौरान भद्रेश्वर के श्रीमानी घाट पर गौरी साहानी भी नदी में उतरे।
बताया जा रहा है कि वह विसर्जित प्रतिमाओं के ढांचे निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच वह पानी में डूबने लगे।
कुछ देर तक वह नदी से बाहर नहीं निकल सके। आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी हुई तो उन्हें बचाने का प्रयास शुरू किया गया।
स्थानीय लोगों ने नदी से बाहर निकाला
गौरी साहानी को पानी में डूबता देखकर स्थानीय लोग तत्काल उनकी सहायता के लिए आगे आए।
प्रत्यक्षदर्शियों से जुड़ी स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोगों ने नदी में उतरकर उन्हें बाहर निकाला।
इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
हालांकि, उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
भद्रेश्वर में भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुख थे गौरी साहानी
मृतक गौरी साहानी स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे।
वह भद्रेश्वर इलाके में पार्टी के शक्ति केंद्र प्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
भाजपा संगठन में शक्ति केंद्र का संबंध स्थानीय स्तर पर बूथों के समन्वय और संगठनात्मक गतिविधियों से होता है।
गौरी साहानी की मौत की खबर सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है।
हालांकि, उनके परिवार और अन्य व्यक्तिगत विवरणों के संबंध में अभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
श्रीमानी घाट पर हुई घटना
हादसा हुगली जिले के भद्रेश्वर स्थित श्रीमानी घाट के पास हुआ।
दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान गंगा नदी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है।
प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद नदी में बचे हुए ढांचे और अन्य सामग्री को बाहर निकालने का काम भी किया जाता है।
इसी प्रक्रिया के दौरान यह हादसा होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, गौरी साहानी किस स्थान पर पानी में डूबे और नदी की गहराई कितनी थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बुधवार रात हुआ दर्दनाक हादसा
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना बुधवार रात की है।
दिनभर विभिन्न पूजा समितियों की ओर से दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था।
इसके बाद रात में भी कुछ घाटों पर विसर्जन से संबंधित गतिविधियां जारी थीं।
गौरी साहानी इसी दौरान श्रीमानी घाट पहुंचे थे।
नदी में उतरकर प्रतिमाओं के ढांचे निकालते समय वह पानी में डूब गए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल पहुंचाए जाने के बावजूद उनकी मौत हो गई।
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए विशेष इंतजाम
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद गंगा और हुगली नदी के विभिन्न घाटों पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
इस दौरान सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, सफाई और आपातकालीन सहायता की विशेष व्यवस्था की जाती है।
इस वर्ष भी कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में विसर्जन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।
21 अक्टूबर की शाम सात बजे तक कोलकाता और हावड़ा के विभिन्न घाटों पर 700 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका था।
विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पूजा समितियों के सदस्यों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने कई स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है।
नदी से प्रतिमाओं के ढांचे निकालना जोखिम भरा
दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण आमतौर पर मिट्टी, बांस, लकड़ी और अन्य सामग्रियों से किया जाता है।
विसर्जन के बाद इन प्रतिमाओं के कुछ ढांचे पानी में रह जाते हैं।
नदी को साफ रखने और जल प्रदूषण कम करने के लिए विसर्जन के बाद ऐसी सामग्रियों को बाहर निकाला जाता है।
हालांकि, नदी के भीतर उतरकर भारी ढांचे निकालना जोखिम भरा काम हो सकता है।
पानी की गहराई, बहाव और जलमग्न वस्तुओं की मौजूदगी के कारण दुर्घटना की आशंका रहती है।
इसी वजह से ऐसी गतिविधियों के दौरान प्रशिक्षित कर्मचारियों और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई घाटों पर सफाई अभियान की व्यवस्था
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद नदी को स्वच्छ रखने के लिए कोलकाता नगर निगम ने विशेष सफाई अभियान की व्यवस्था की है।
अधिकारियों के अनुसार, 21 से 24 अक्टूबर तक विभिन्न घाटों पर चौबीसों घंटे सफाई और प्रतिमा अवशेष हटाने की व्यवस्था की गई है।
इसके लिए 27 घाटों पर नगर निगम के विभिन्न विभागों के 611 कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
साथ ही आपातकालीन सहायता के लिए चिकित्सा दल, एंबुलेंस और बचाव उपकरणों की व्यवस्था भी की गई है।
हालांकि, इन व्यवस्थाओं का संबंध मुख्य रूप से कोलकाता के निर्धारित घाटों से है। भद्रेश्वर के श्रीमानी घाट पर हादसे के समय मौजूद सुरक्षा सुविधाओं का विवरण स्पष्ट नहीं है।
विसर्जन घाटों पर सुरक्षा की आवश्यकता
गंगा नदी में हुई इस घटना ने विसर्जन के बाद की गतिविधियों में सुरक्षा संबंधी सावधानियों का महत्व फिर सामने ला दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदी में उतरते समय पानी की गहराई और बहाव का अनुमान लगाना हमेशा आसान नहीं होता।
कई बार किनारे पर पानी कम गहरा दिखाई देता है, लेकिन कुछ दूरी पर अचानक गहराई बढ़ सकती है।
इसके अलावा पानी के भीतर मौजूद बांस, रस्सियां और अन्य सामग्री भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
इसलिए नदी की सफाई या प्रतिमा अवशेष निकालने के दौरान उचित सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
स्थानीय स्तर पर शोक का माहौल
गौरी साहानी की मौत की खबर के बाद भद्रेश्वर इलाके में शोक का माहौल है।
61 वर्षीय गौरी साहानी स्थानीय भाजपा संगठन से जुड़े थे और शक्ति केंद्र प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
उनकी अचानक मौत से स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में दुख व्यक्त किया जा रहा है।
हालांकि, घटना को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की किसी विशिष्ट प्रतिक्रिया की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दुर्घटना की परिस्थितियां स्पष्ट होना बाकी
इस हादसे के संबंध में फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गौरी साहानी प्रतिमा विसर्जन के बाद गंगा से ढांचे निकालने के दौरान डूब गए थे।
स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी मौत हो गई।
नदी में उतरने के बाद वह किस कारण संतुलन खो बैठे या किस परिस्थिति में डूबे, इसका विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
पुलिस या स्थानीय प्रशासन की ओर से मामले में की गई जांच और आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी भी अभी उपलब्ध नहीं है।
विसर्जन की खुशियों के बीच पसरा मातम
दुर्गा पूजा और प्रतिमा विसर्जन के उत्सव के बीच भद्रेश्वर में हुई इस दुर्घटना ने स्थानीय लोगों को दुखी कर दिया है।
जिस समय विभिन्न स्थानों पर देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा था, उसी दौरान गंगा नदी में उतरे भाजपा नेता गौरी साहानी की जान चली गई।
घटना के बाद अब विसर्जन घाटों पर सुरक्षा और प्रतिमा अवशेषों को निकालने की प्रक्रिया में सावधानी बरतने की आवश्यकता फिर सामने आई है।
फिलहाल स्थानीय रिपोर्टों से पुष्टि हुई है कि 61 वर्षीय गौरी साहानी की गंगा नदी में डूबने से मौत हुई। उन्हें स्थानीय लोगों ने बचाकर अस्पताल पहुंचाया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।





