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अर्नब के बाद एक और चक्रवात की आहट, 'मुरासु' को लेकर अलर्ट

Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 1:09 PM IST
अर्नब के बाद एक और चक्रवात की आहट, मुरासु को लेकर अलर्ट
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नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान बनने से दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राज्यों में मौसम बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहे आंध्र प्रदेश के सामने अब एक नई मौसमी चुनौती खड़ी हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र गहरे अवदाब में बदल चुका है। इसके आगे चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसके 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट के नजदीक पहुंचने और 3 नवंबर की सुबह तट से टकराने की आशंका जताई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंचने के दौरान इसकी ताकत बढ़ सकती है। अनुमान है कि यह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में दस्तक दे सकता है। इसके संभावित लैंडफॉल क्षेत्र में नेल्लोर से नरसापुर के बीच का तटीय इलाका शामिल है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है।
मुरासु नाम से पहचाना जा सकता है तूफान
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय यह सिस्टम चक्रवाती तूफान का रूप लेने पर मुरासु (Murasu) कहलाएगा। यह नाम भारत की ओर से प्रस्तावित किया गया है। फिलहाल मौसम वैज्ञानिक इसकी दिशा, गति और तीव्रता पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ समुद्र में हलचल बढ़ने और तटीय इलाकों में तेज हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन को समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों और मछुआरों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
आंध्र प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
चक्रवात का सबसे ज्यादा प्रभाव आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग और आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) ने कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई है।
1 नवंबर को कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम, मार्कापुरम और नेल्लोर जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं, 2 नवंबर को एलुरु, पश्चिम गोदावरी, एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, प्रकाशम, मार्कापुरम, नेल्लोर और तिरुपति में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
इसके अलावा पूर्वी गोदावरी, कोनसीमा, नंद्याल, कडप्पा, अन्नामय्या और चित्तूर में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है। 3 नवंबर को विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली, विजयनगरम, कुरनूल, नेल्लोर और तिरुपति समेत कई जिलों में बहुत भारी बारिश हो सकती है।
ओडिशा, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी मौसम बदलेगा
चक्रवात के प्रभाव से केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने ओडिशा में 3 और 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 2 और 3 नवंबर को भारी बारिश हो सकती है। तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी इन तारीखों के दौरान बारिश की संभावना है। वहीं, केरल और माहे में 4 नवंबर तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।
पुडुचेरी के यानम क्षेत्र में भी चक्रवात का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसलिए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए मछुआरों के लिए भी चेतावनी जारी की गई है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने की आशंका के कारण मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाकों में समुद्र की स्थिति खराब रहने का अनुमान है।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने मछुआरों को बुधवार तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है। समुद्र में पहले से मौजूद मछुआरों को भी सुरक्षित लौटने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की बात कही गई है।
अर्नब के बाद फिर बढ़ी आंध्र प्रदेश की चिंता
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश हाल ही में चक्रवात अर्नब के प्रभाव का सामना कर चुका है। 28 अक्टूबर को आए इस तूफान के कारण राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं से नुकसान हुआ था। कई स्थानों पर जलभराव, सड़कें बाधित होने और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की खबरें सामने आई थीं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
अब कुछ ही दिनों के भीतर एक नए चक्रवाती सिस्टम के आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। लगातार दो मौसमी घटनाओं का सामना करना तटीय क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मौसम विभाग की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से समुद्र तटों और निचले इलाकों में जाने से बचें। घरों में जरूरी सामान, दवाइयां और पीने के पानी की व्यवस्था रखें तथा प्रशासन की ओर से जारी अलर्ट पर नजर बनाए रखें।
फिलहाल चक्रवात की दिशा और तीव्रता पर लगातार निगरानी की जा रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 2 नवंबर की शाम तक सिस्टम आंध्र प्रदेश के तट के करीब पहुंच सकता है, जबकि संभावित लैंडफॉल 3 नवंबर की सुबह होने का अनुमान है। ऐसे में अगले 48 घंटे दक्षिण भारत के कई तटीय इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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