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BIG BREAKING: ED ने कर्नाला सहकारी बैंक के 386 करोड़ की संपत्ति MPID को सौंपी
Shantanu Roy
30 July 2025 2:49 PM IST

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जारी किया ये बयान...
Mumbai. मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाला नगरी सहकारी बैंक लिमिटेड, पनवेल से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में 386 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त सक्षम प्राधिकारी, MPID कोर्ट (Maharashtra Protection of Interest of Depositors Act) को सौंप दिया है। इस कदम का उद्देश्य उन जमाकर्ताओं को राहत प्रदान करना है जिन्होंने बैंक घोटाले के चलते अपना पैसा गंवा दिया था। यह कार्रवाई ED की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग के तहत की गई जांच का हिस्सा है। कर्नाला बैंक से जुड़े इस मामले में भारी संख्या में निवेशकों को धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा था।
प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने कर्नाला नगरी सहकारी बैंक लिमिटेड, पनवेल के मामले में सक्षम प्राधिकारी, MPID (महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त) को 386 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां वापस कर दी हैं, ताकि बैंक के उन जमाकर्ताओं के बीच इनका वितरण किया जा सके, जिन्होंने… pic.twitter.com/jEs46NROK6
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 30, 2025
बैंक के अधिकारियों द्वारा कथित रूप से अनियमित ऋण वितरण, नियमों की अनदेखी और फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई थी, जिससे हजारों जमाकर्ताओं का भविष्य संकट में आ गया था। ED ने जांच के दौरान पाया कि बैंक की रकम का दुरुपयोग कर विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था, जिनमें कई आवासीय और वाणिज्यिक भूखंड, इमारतें और फ्लैट शामिल थे। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इन संपत्तियों को पहले अटैच किया गया था। अब इन्हें MPID कोर्ट को स्थानांतरित कर दिया गया है ताकि पीड़ित जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि का कुछ हिस्सा लौटाया जा सके। MPID अधिनियम के तहत, अदालत इन संपत्तियों को नीलाम करके प्राप्त धनराशि को जमाकर्ताओं में उनके दावों के अनुसार वितरित करेगी।
यह कदम महाराष्ट्र सरकार और ED के बीच समन्वय का एक उदाहरण है, जिसका उद्देश्य आर्थिक अपराधों से पीड़ित आम नागरिकों को राहत दिलाना है। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। ED की ओर से कहा गया है कि उनकी जांच अभी भी जारी है और अन्य संबंधित संपत्तियों की पहचान तथा कुर्की की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। कर्नाला बैंक घोटाले ने न केवल निवेशकों को नुकसान पहुंचाया बल्कि सहकारी बैंकिंग प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए थे। इस कार्रवाई को निवेशकों के हित में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य तथ्य:
386 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां MPID कोर्ट को सौंपी गईं।
संपत्तियों की नीलामी के बाद राशि जमाकर्ताओं में वितरित की जाएगी।
ED ने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत यह कार्रवाई की।
जांच के दौरान कई संपत्तियों को पहले ही अटैच किया गया था।
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