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इंदौर में 51 फर्जी शिक्षकों का बड़ा खुलासा...

SHIDDHANT
9 Oct 2026 12:32 AM IST
इंदौर में 51 फर्जी शिक्षकों का बड़ा खुलासा...
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शिक्षक भर्ती का बड़ा फर्जीवाड़ा, 51 के खिलाफ FIR के निर्देश
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में शिक्षक भर्ती से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सांवेर विकासखंड में फर्जी डीएड और बीएड डिग्री तथा अंकसूचियों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 51 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। आरोप है कि ये शिक्षक करीब 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे थे और लगातार वेतन प्राप्त कर रहे थे। इनमें से कई शिक्षकों को पदोन्नति भी मिल चुकी है। जांच में शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग अब वेतन वसूली की तैयारी कर रहा है। वसूली की अनुमानित राशि करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
जानकारी के अनुसार, मामला वर्ष 2006-07 में सांवेर विकासखंड में हुई संविदा शाला शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। उस समय नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में 51 शिक्षकों की डीएड और बीएड से संबंधित डिग्री तथा अंकसूचियां फर्जी पाई गई हैं।
इस मामले की शिकायत वर्ष 2021 में हुई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन शुरू कराया। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से प्राप्त जानकारी में सामने आया कि कई अंकसूचियां मंडल द्वारा जारी ही नहीं की गई थीं। कुछ दस्तावेजों में एक ही रोल नंबर पर दूसरे परीक्षार्थी की जानकारी मिली। दस्तावेजों की जांच के लिए चार प्राचार्यों की समिति भी बनाई गई थी। समिति ने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके अलावा विशेष कार्य बल ने भी मामले की जांच की, जिसमें संबंधित शैक्षणिक दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी सामने आई।
जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने संबंधित संकुल प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को 51 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले सितंबर 2024 में भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी थी। जांच में सामने आया है कि संबंधित शिक्षक लंबे समय से सरकारी विद्यालयों में कार्यरत हैं। इनमें से कुछ शिक्षकों को पदोन्नति भी मिल चुकी है। वर्तमान में इनका मासिक वेतन लगभग 50 हजार रुपये से एक लाख रुपये के बीच बताया गया है।
शिक्षा विभाग अब इन शिक्षकों को नौकरी की अवधि में दिए गए वेतन की गणना कर रहा है। अधिकारियों के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, कुल वसूली करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। प्रत्येक शिक्षक की सेवा अवधि और प्राप्त वेतन के आधार पर वास्तविक राशि निर्धारित की जाएगी। इस मामले में लोकायुक्त की जांच भी जारी है। लोकायुक्त ने कुल 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड शिक्षा विभाग से मांगा है। इनमें 51 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि 23 अन्य संदिग्ध शिक्षकों की जांच अभी जारी है।
करीब दो दशक पुरानी भर्ती में सामने आई अनियमितताओं के बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां कैसे हुईं और इतने वर्षों तक संबंधित कर्मचारी सेवा में कैसे बने रहे। फिलहाल शिक्षा विभाग ने कानूनी कार्रवाई और वेतन वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की है। मामले में अंतिम वसूली राशि और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई स्पष्ट होना बाकी है।

जनता से रिश्ता इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। यह जानकारी जनस्रोतों और सोशल मीडिया माध्यमों से प्राप्त हुई है।

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