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Delhi दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए लंबित 3,284 करोड़ रुपए की शिक्षा निधि जल्द जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस राशि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि शिक्षा एक संवैधानिक जिम्मेदारी है और स्कूल शिक्षा के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता को नीतिगत मतभेदों के आधार पर रोका नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और राज्य को मिलने वाली शिक्षा निधि को एनईपी या त्रिभाषा नीति अपनाने की शर्त से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य ने इसी मॉडल के माध्यम से साक्षरता, उच्च शिक्षा में नामांकन और मानव विकास सूचकांकों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। विजय ने वित्तीय संघवाद (फिस्कल फेडरलिज्म) का मुद्दा उठाते हुए केंद्र से राज्यों के बीच संसाधनों का निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, सामाजिक विकास के मानकों में सुधार करने और जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों को उचित प्रोत्साहन और मान्यता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे राज्यों को संसाधनों के आवंटन या संसदीय प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से महान तमिल साहित्यिक कृति ‘तिरुक्कुरल’ को भारत का राष्ट्रीय साहित्य घोषित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि संत कवि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह ग्रंथ भाषा, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से परे मानवता के लिए सार्वभौमिक मूल्यों का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने श्रीलंका और पाकिस्तान में हिरासत में रखे गए तमिलनाडु के मछुआरों और उनकी नौकाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कूटनीतिक प्रयास कर मछुआरों और उनकी नौकाओं की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हजारों तटीय परिवारों की आजीविका मछली पकड़ने पर निर्भर है, इसलिए मछुआरों की बार-बार होने वाली गिरफ्तारियों को रोकने और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार कूटनीतिक संवाद आवश्यक है। बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने शिक्षा, राज्यों के अधिकार, सांस्कृतिक पहचान और मछुआरों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर जोर देते हुए संघीय ढांचे में राज्यों की स्वायत्तता और समान व्यवहार की मांग दोहराई।
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