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शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस के साइबर क्राइम विंग ने नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए सलाह दी है कि जब वाई-फाई और ब्लूटूथ की जरूरत न हो तो इन्हें बंद रखा जाए। पुलिस ने खास तौर पर यात्रा के दौरान और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर अनजान वायरलेस नेटवर्क और अपरिचित उपकरणों से कनेक्ट होने से बचने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, बिना जरूरत वायरलेस कनेक्टिविटी चालू रखने से मोबाइल फोन की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा से जुड़े अनावश्यक जोखिम बढ़ सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश पुलिस के साइबर क्राइम अन्वेषक एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने कहा कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते समय घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि कुछ आसान सावधानियों को अपनी रोजमर्रा की डिजिटल आदतों में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जरूरत हो तभी किसी नेटवर्क या डिवाइस से कनेक्ट करें और काम पूरा होने के बाद उसे डिस्कनेक्ट कर दें। अनजान वाई-फाई और ब्लूटूथ नेटवर्क से ऑटोमेटिक कनेक्शन और अपरिचित ब्लूटूथ डिवाइस से कनेक्ट होने से बचना चाहिए। पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाने के लिए फर्जी या दुर्भावनापूर्ण वाई-फाई हॉटस्पॉट तैयार कर सकते हैं।
पुलिस ने डिजिटल सुरक्षा के लिए ‘रुकें-जांचें-फिर कनेक्ट करें’ का संदेश दिया है। रुकें यानी अनजान नेटवर्क से अपने-आप कनेक्ट न हों। जांचें यानी संवेदनशील जानकारी दर्ज करने से पहले नेटवर्क और वेबसाइट की विश्वसनीयता सुनिश्चित करें। इसके बाद ही कनेक्ट करें, यानी केवल विश्वसनीय नेटवर्क और परिचित उपकरणों का इस्तेमाल करें। साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत स्क्रीन लॉक और टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2एफए) का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ओटीपी, पासवर्ड, पिन और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
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