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साइक्लोन 'मुरासु' का खतरा! ट्रेनें-फ्लाइट्स रद्द, स्कूल-कॉलेज बंद
Rajeshwari Nishad
2 Nov 2026 11:59 PM IST

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नई दिल्ली। पूर्वी भारत के तटीय इलाकों में चक्रवात 'मुरासु' को लेकर चिंता बढ़ गई है। चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियों और राहत-बचाव व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्यों में चक्रवाती तूफानों के दौरान तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा रहता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन के सामने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है।
चक्रवात 'मुरासु' के तट से टकराने से पहले लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने और राहत एजेंसियों को सक्रिय किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या, चक्रवात की मौजूदा स्थिति और तट से टकराने के संभावित समय की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान
चक्रवाती तूफान के दौरान सबसे अधिक खतरा समुद्र किनारे बसे गांवों, निचले इलाकों और कमजोर मकानों में रहने वाले लोगों को होता है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने और संचार व्यवस्था बाधित होने की आशंका रहती है। लगातार भारी बारिश होने से जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना, सुरक्षित आश्रय स्थलों की व्यवस्था करना और जरूरत पड़ने पर लोगों को समय रहते वहां पहुंचाना होती है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षित निकासी पर ध्यान देना जरूरी है।
आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गंभीर चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के 2 नवंबर की रात 11:30 बजे से 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के पास तट से टकराने की संभावना है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।मौसम विभाग ने दक्षिणी आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों के लिए रेड चेतावनी जारी की है। तेज हवाओं के साथ समुद्र में ऊंची लहरें उठने और निचले तटीय इलाकों में पानी भरने की आशंका जताई गई है।
हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
आंध्र प्रदेश में प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन के मुताबिक, लगभग 2,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका था और करीब 30,000 लोगों को निकालने की योजना बनाई गई थी। इस तरह लाखों लोगों के विस्थापन के दावे की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है।नेल्लोर जिला प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। प्रभावित लोगों के लिए चक्रवात आश्रय स्थल खोले गए हैं, जहां भोजन, दूध और पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
ओडिशा और तमिलनाडु में भी सतर्कता
चक्रवात का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने तमिलनाडु, तेलंगाना, दक्षिण ओडिशा और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है।ओडिशा के रायगड़ा जिले में संभावित भूस्खलन और आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए दमकल विभाग की 11 टीमों को तैयार रखा गया है। वहीं चेन्नई में भारी बारिश की चेतावनी के बीच सोमवार को स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया।
रेल सेवाएं प्रभावित, मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह
चक्रवात के कारण परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। रेलवे ने एहतियातन नौ ट्रेनों को रद्द करने की सूचना दी है। यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले ट्रेनों की अद्यतन स्थिति की जांच करने की सलाह दी गई है।मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश, उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण ओडिशा के तटीय समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी जारी की है।
बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए विशेष इंतजाम
चक्रवात के दौरान तेज हवाओं और भारी बारिश से बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने आंध्र प्रदेश की सहायता के लिए बिजली विभाग के 500 कर्मचारियों को 25 टीमों में भेजने की जानकारी दी है। आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था जल्द बहाल की जा सके।
प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से आधिकारिक मौसम चेतावनियों का पालन करने, समुद्र तटों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने तथा अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। लोगों को आवश्यक दवाइयां, पेयजल, खाद्य सामग्री और मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था रखने की सलाह दी जा रही है।चक्रवात 'मुरासु' के तट से टकराने से पहले अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राहत और बचाव एजेंसियों की तैयारियों के साथ प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनहानि को रोकना और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाना है।
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