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Pune घटना के बाद ‘शक्ति एक्ट’ पर सियासी बहस तेज, अनिल देशमुख और फडणवीस में जुबानी टकराव

Harrison
3 May 2026 9:51 PM IST
Pune घटना के बाद ‘शक्ति एक्ट’ पर सियासी बहस तेज, अनिल देशमुख और फडणवीस में जुबानी टकराव
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Mumbai मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। Anil Deshmukh, जो Nationalist Congress Party (Sharad Pawar faction) के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री रह चुके हैं, ने राज्य में ‘शक्ति एक्ट’ को तुरंत लागू करने की मांग की है। यह मांग पुणे जिले में चार साल की बच्ची के साथ हुए कथित यौन शोषण और हत्या की घटना के बाद सामने आई है।
अनिल देशमुख ने कहा कि अगर राज्य में शक्ति एक्ट पहले से लागू होता, तो ऐसे जघन्य अपराध को रोका जा सकता था और आरोपी इस तरह की हिम्मत नहीं कर पाते। उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सिस्टम को और अधिक सख्त और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। राज्य में विपक्ष लगातार सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहा है और कड़े कानून लागू करने की मांग कर रहा है। पुणे की इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है।
वहीं, इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर खुद गंभीर आरोप हैं, खासकर “कैश-फॉर-ट्रांसफर” जैसे मामलों में जिनका नाम जुड़ता रहा है, उन्हें दूसरों को कानून व्यवस्था पर सलाह देने का नैतिक अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि राज्य में कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
पुणे में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद आम जनता में भी गुस्सा देखा जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तेज न्याय प्रक्रिया की मांग की है। साथ ही, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर नए और प्रभावी कानूनों की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं नीतिगत सुधारों और कड़े कानूनों की जरूरत को फिर से उजागर करती हैं। हालांकि, कानून के साथ-साथ इसके प्रभावी क्रियान्वयन को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल, इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ सख्त कानून की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
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