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रूसी तेल खरीदना अचानक बंद नहीं करेगा भारत, ट्रंप के 100% टैरिफ पर वित्त मंत्री का बड़ा बयान

SHIDDHANT
23 Sept 2026 9:02 PM IST
रूसी तेल खरीदना अचानक बंद नहीं करेगा भारत, ट्रंप के 100% टैरिफ पर वित्त मंत्री का बड़ा बयान
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Delhi दिल्ली: रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका के 100% टैरिफ वाले नए कानून के बीच भारत ने अपना रुख साफ किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद अचानक बंद नहीं कर सकता और न ही तुरंत किसी दूसरे सप्लायर के पास जा सकता है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है। वहीं, अमेरिकी टैरिफ से भारतीय निर्यात, रोजगार और रुपये पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
रूस से तेल खरीदना तुरंत बंद करना मुश्किल
मंगलवार को ‘बिजनेसलाइन चेंजमेकर अवॉर्ड्स’ कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अचानक रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता। दूसरे देशों से तेल की सप्लाई पर तुरंत शिफ्ट होना भी आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए देश का हित सबसे ऊपर है। इसलिए भारत दुनिया के उन हिस्सों से तेल खरीदता रहेगा, जहां से कच्चा तेल आसानी से और उचित शर्तों पर उपलब्ध हो।
तेल की कीमत और सप्लाई पर असर का खतरा
वित्त मंत्री के मुताबिक अगर भारत रूस से तेल लेना अचानक बंद करता है और दूसरे देशों से खरीद बढ़ाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का खतरा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव और सप्लाई से जुड़ी समस्याएं मौजूद हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरियों पर हमलों और खाड़ी देशों के तनाव के कारण दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव है। ऐसे में रूस जैसे बड़े सप्लायर से अचानक दूरी बनाने पर ग्लोबल मार्केट का संतुलन बिगड़ने की आशंका है।
भारतीय रिफाइनरियों की भी अपनी जरूरतें
भारत के सामने एक और चुनौती रिफाइनरियों की तकनीकी क्षमता से जुड़ी है। देश की रिफाइनरियां हर तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस नहीं कर सकतीं। उन्हें एक खास तरह के मीडियम क्रूड की जरूरत होती है। इसलिए सरकार को तेल खरीद से जुड़े फैसले लेते समय रिफाइनिंग क्षमता के साथ-साथ आम लोगों की ऊर्जा जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा।
ट्रंप के कानून से भारत पर टैरिफ का खतरा
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साइन करने के बाद यह कानून बन चुका है। अमेरिकी सूची में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। ऐसे में भारत पर भी इस टैरिफ का खतरा बताया गया है।
भारतीय सामान और रोजगार पर असर की आशंका
दिए गए विवरण के मुताबिक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा बाजार है और भारत वहां हर साल करीब 6.5 लाख करोड़ रुपये का सामान निर्यात करता है। 100% टैरिफ लगने पर भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में दोगुना महंगा हो सकता है, जिससे उसकी बिक्री प्रभावित होने की आशंका है। रूसी तेल से भारत को सालाना करीब 60 हजार करोड़ रुपये की बचत बताई गई है। वहीं अमेरिकी बाजार में नुकसान इस बचत से करीब 10 गुना ज्यादा होने का दावा किया गया है।
टैरिफ का असर कपड़ा, हीरा और दवा जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये के निर्यात पर असर पड़ने की स्थिति में 15 से 20 लाख लोगों के रोजगार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। निर्यात घटने से डॉलर की उपलब्धता कम हो सकती है और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है।
जेलेंस्की ने भी तेल खरीद रोकने की मांग की
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भारत और चीन से रूस से तेल खरीदना बंद करने की मांग की है। उनका कहना है कि रूस की अर्थव्यवस्था को भारत और चीन से मिलने वाला पैसा सहारा दे रहा है। जेलेंस्की के मुताबिक अगर दोनों देश रूस से तेल खरीदना बंद कर दें तो रूस के पास पैसे की कमी हो जाएगी और इसके बाद युद्ध अपने आप रुक सकता है।
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