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ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने के लिए किया मजबूर, हमले के डर से 12 अमेरिकी बमवर्षक हटे

SHIDDHANT
9 Oct 2026 11:22 PM IST
ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने के लिए किया मजबूर, हमले के डर से 12 अमेरिकी बमवर्षक हटे
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लंदन/वॉशिंगटन। ब्रिटेन में अमेरिकी वायुसेना के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने RAF फेयरफोर्ड पर हमले की कथित साजिश के बाद अमेरिका ने बड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने ब्रिटेन स्थित एयरबेस से अपने बमवर्षक विमानों को वापस अमेरिका भेजने की पुष्टि की है। करीब 12 B-1 बमवर्षक विमानों की वापसी को ईरान से जुड़े संभावित खतरे के मद्देनजर उठाया गया एहतियाती कदम बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्वीकार किया है कि संभावित खतरे को देखते हुए विमानों को हटाने का निर्णय लिया गया।
मामला 27 सितंबर का है, जब ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर स्थित RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुई थीं। पुलिस ने एयरबेस के पास पांच ब्रिटिश नागरिकों को आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी के संदेह में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान तीन संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली गई। इनमें पेट्रोल मिलने की जानकारी सामने आई, हालांकि कोई विस्फोटक बरामद नहीं हुआ। गिरफ्तार पांचों संदिग्धों को अगले दिन कड़ी शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया गया। ब्रिटिश आतंकवाद निरोधक पुलिस ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने के बावजूद जांच जारी है।
इस मामले में बाद में दो अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया। इनमें ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाला एक व्यक्ति शामिल था। आठ अक्टूबर तक कुल सात संदिग्धों को जमानत मिल चुकी थी। पुलिस संभावित विदेशी संबंधों और कथित साजिश की जांच कर रही है। इस बीच अमेरिका ने RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर तैनात बमवर्षक विमानों को वापस बुलाने का निर्णय लिया। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, वहां तैनात सभी अमेरिकी बमवर्षक अपने घरेलू ठिकानों पर लौट गए हैं। इनमें B-1 और B-52 मॉडल के विमानों का उल्लेख है। करीब 12 B-1 विमानों की वापसी की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, सभी B-2 और कथित B-12 विमानों को हटाए जाने का दावा सही नहीं है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच अक्टूबर को कहा कि संभावित खतरे की जानकारी मिलने के बाद विमानों को सुरक्षित स्थान पर भेजना उचित समझा गया। उन्होंने कहा कि जब किसी सैन्य ठिकाने को खतरा हो, तो वहां मौजूद महत्वपूर्ण विमानों को हटाकर जोखिम कम किया जा सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस खतरे के पीछे ईरान से जुड़े तत्वों की संभावित भूमिका की आशंका जताई है। कुछ अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी बमवर्षकों को ड्रोन हमले से निशाना बनाए जाने की आशंका थी। हालांकि, ईरान ने कथित साजिश में किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में किया है। इसी वजह से यह ठिकाना मौजूदा तनाव के दौरान विशेष महत्व रखता है। इस घटनाक्रम के बाद दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। हालांकि, अमेरिकी विमानों की वापसी को सैन्य हार या ईरान की निर्णायक सफलता मानने का कोई आधिकारिक आधार नहीं है। अमेरिका ने इसे सुरक्षा संबंधी एहतियाती निर्णय बताया है।
वहीं, ब्रिटिश सरकार ने वोट बैंक के डर से संदिग्धों की पहचान छिपाई, इस आरोप की भी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियां कथित साजिश की जांच कर रही हैं। अमेरिकी बमवर्षकों की वापसी से यह स्पष्ट हुआ है कि संभावित हमलों के खतरे को गंभीरता से लिया गया है। हालांकि, कथित साजिश में ईरान की वास्तविक भूमिका और गिरफ्तार संदिग्धों की संलिप्तता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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