
x
फरीदकोट। पंजाब के फरीदकोट जिले के पक्की कलां गांव में किसानों द्वारा खेतों में धान की पराली जलाने का मामला सामने आया है। किसानों ने धान की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को आग के हवाले कर दिया। पराली जलाने की इस घटना ने एक बार फिर कृषि अवशेषों के निपटान और वायु प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं को सामने ला दिया है।
पंजाब में धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली का प्रबंधन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना रहता है। कई किसान अगली फसल की बुवाई के लिए खेतों को जल्दी तैयार करने के उद्देश्य से पराली जलाने का तरीका अपनाते हैं। हालांकि, इससे निकलने वाला धुआं वातावरण में प्रदूषण बढ़ाने का कारण बन सकता है।
फरीदकोट के पक्की कलां गांव में सामने आई घटना भी इसी समस्या से जुड़ी है। खेतों में पराली जलाने से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म प्रदूषक कण और अन्य हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं। इनका असर आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता पर पड़ सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषित हवा स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकती है।
पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी जैविक पदार्थों और कुछ पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विशेषज्ञ फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए मशीनों और अन्य वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की सलाह देते हैं।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं हर साल पर्यावरण संबंधी चर्चा का विषय बनती हैं। ऐसे में किसानों को जागरूक करना और फसल अवशेषों के उचित निपटान के विकल्प उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल पक्की कलां गांव में हुई इस घटना के संबंध में प्रशासनिक कार्रवाई की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
Next Story





