भारत

विदेशी घोषित पांच महिलाओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Saba Naaz
18 July 2026 8:33 PM IST
विदेशी घोषित पांच महिलाओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
x

नई दिल्ली। असम में विदेशी घोषित की गईं पांच महिलाओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इन महिलाओं ने अपने खिलाफ जारी निर्वासन आदेशों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता तय करने की प्रक्रिया को निष्पक्ष और कानूनी तरीके से पूरा करने पर जोर दिया।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश असम सरकार के वकील की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद दिया। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

यह मामला असम में नागरिकता और पहचान से जुड़े विवादों से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता पांच महिलाओं ने विदेशी न्यायाधिकरणों के उन फैसलों को चुनौती दी है, जिनमें उन्हें विदेशी नागरिक घोषित किया गया था। इन महिलाओं का कहना है कि उनके खिलाफ जारी आदेशों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए और उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

इन पांच महिलाओं में से दो वर्तमान में हिरासत केंद्रों में बंद हैं। वे अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में हैं। इससे पहले पांच जून को सुप्रीम कोर्ट ने इन महिलाओं की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और उनके निर्वासन पर फिलहाल रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इस आदेश से उन्हें तत्काल राहत मिली थी।

मामले की पृष्ठभूमि में गौहाटी हाईकोर्ट का फैसला भी शामिल है। हाईकोर्ट ने विदेशी न्यायाधिकरण के उन आदेशों को बरकरार रखा था, जिनमें इन महिलाओं को बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी बताया गया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया। वकीलों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी स्पष्ट किया है कि राज्य को अवैध प्रवासियों की पहचान करने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता का फैसला उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। अदालत का कहना है कि नागरिकता जैसे संवेदनशील मामलों में केवल संदेह के आधार पर फैसला नहीं किया जा सकता और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि विदेशी न्यायाधिकरणों द्वारा दिए गए फैसलों में कई कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले की नए सिरे से और निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचना चाहिए और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।

अब असम सरकार का जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगा। इस मामले का फैसला न केवल इन पांच महिलाओं बल्कि असम में नागरिकता विवाद से जुड़े अन्य मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन महिलाओं को राहत मिली है और उनके निर्वासन की प्रक्रिया पर रोक जारी है। अब सभी की नजरें असम सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि नागरिकता तय करने की प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और कानूनी तरीके से पूरी की गई।

Next Story