
x
क्राइम
छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक माह के मासूम बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक, बच्चे को उसके जैविक माता-पिता ने करीब 1.30 लाख रुपये में एक महिला को सौंपा था। इसके बाद महज 48 घंटे के भीतर बच्चा कई लोगों के हाथों से गुजरता हुआ नांदेड़ के रास्ते तेलंगाना और फिर हैदराबाद पहुंच गया। पुलिस ने मामले में बच्चे के माता-पिता समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। बच्चे को हैदराबाद से सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, बीते 20 अगस्त को वंदना योगेश कांबळे नाम की महिला थाने पहुंची थी। उसने शुरुआत में अपने साथ मारपीट की शिकायत की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि महिला के करीब तीन महीने पहले बच्चा हुआ था और बच्चे को कथित तौर पर पैसे लेकर किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
बच्चे को वापस लेने पहुंची मां
जांच में सामने आया कि वंदना और उसके पति ने बच्चे को शिमा रेशीवाल को करीब 1.30 लाख रुपये में सौंपा था। हालांकि, शुरुआती जानकारी में रकम 1.20 लाख रुपये भी बताई गई थी। बाद में वंदना की तबीयत खराब होने पर डॉक्टर ने उसे बच्चे को फीडिंग कराने की जरूरत बताई। इसके बाद वह शिमा के पास बच्चे को वापस लेने पहुंची, लेकिन कथित तौर पर बच्चे को वापस नहीं किया गया। इसी बिंदु से पुलिस ने बच्चे की खरीद-फरोख्त की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया।
पूछताछ में सामने आई पूरी चेन
पुलिस ने जांच के दौरान बच्चे के माता-पिता के बाद शिमा रेशीवाल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में शिमा ने कथित तौर पर बताया कि उसने बच्चे को पडेगांव की रहने वाली संगीता आवाड को करीब 2.70 लाख रुपये में दिया था। इसके बाद संगीता से पूछताछ में सुरेश नाम के व्यक्ति का पता चला। जांच के मुताबिक, सुरेश बच्चे को लेने के लिए नांदेड़ रेलवे स्टेशन पहुंचा था। इसके बाद बच्चे को उसकी रिश्तेदार उमा गंगाधर कटकम तक पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग लोगों के बीच लेन-देन के साथ बच्चे के लिए तय रकम बढ़ती गई और यह करीब 3.50 लाख रुपये तक पहुंच गई।
हैदराबाद से सुरक्षित बरामद हुआ बच्चा
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे को सुरक्षित बरामद करना थी। जांच में बच्चे के हैदराबाद में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने आरोपियों को दस्तावेज लेने के बहाने बुलाने की योजना बनाई। आरोपी जब वहां पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया। बच्चे को महाराष्ट्र वापस लाकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति के आदेश के बाद उसे एक संस्था की देखरेख में सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे के माता-पिता को मिली रकम में से करीब 62 हजार रुपये के सोने के गहने और दो मोबाइल फोन खरीदे गए थे। पुलिस ने इन सामानों को बरामद करने की बात कही है। मामले में BNS की संबंधित धाराओं और Juvenile Justice Act की धारा 88 के तहत कार्रवाई की जा रही है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित खरीद-फरोख्त में सात आरोपियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या संगठित नेटवर्क भी शामिल था या नहीं। सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की जांच और पूछताछ की कार्रवाई की जा रही है।
Next Story





