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SSP बोले- SIT ने खंगाले थे सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर मामले से संबंधित विभिन्न दावों के बीच पौड़ी गढ़वाल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सर्वेश पंवार ने पुलिस जांच को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के संबंध में कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्य प्रसारित किए जा रहे हैं। मामले की जांच करने वाली तत्कालीन विशेष जांच टीम (SIT) ने आरोपियों और संबंधित व्यक्तियों के सभी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की समीक्षा की थी।
SIT ने कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की
एसएसपी सर्वेश पंवार ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों और मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई थी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन एसआईटी ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण किया था। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य संबंधित जानकारियों को भी ध्यान में रखा गया।
सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप
एसएसपी ने कहा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर मामले से जुड़ी भ्रामक जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं। उनके बयान का उद्देश्य जांच से संबंधित तथ्यों को स्पष्ट करना है। हालांकि, उन्होंने साझा किए गए बयान के इस हिस्से में किसी विशेष सोशल मीडिया पोस्ट या व्यक्ति का नाम नहीं बताया।
तीन दोषियों को मिल चुकी है उम्रकैद
अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या हुई थी। वह पौड़ी गढ़वाल जिले के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। एसआईटी ने जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। मई 2025 में कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
88 दिनों में पूरी हुई थी SIT जांच
उत्तराखंड पुलिस ने 15 अक्टूबर को मामले की जांच और न्यायिक कार्रवाई का विवरण भी प्रस्तुत किया। अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन के अनुसार, घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी करके करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था।
सीबीआई जांच को लेकर भी उठ रहे सवाल
अंकिता भंडारी के परिजन मामले में अन्य संभावित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग करते रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फरवरी 2026 में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। परिजनों ने जांच की प्रगति और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, किसी अतिरिक्त व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता को बिना प्रमाण के स्थापित नहीं माना जा सकता। फिलहाल एसएसपी सर्वेश पंवार के बयान से स्पष्ट है कि पुलिस पूर्व में की गई एसआईटी जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की समीक्षा का हवाला दे रही है।
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