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पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, मानसून एक बड़ा जोखिम : आरबीआई गवर्नर
jantaserishta.com
17 July 2026 4:11 PM IST

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मुंबई: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत बना हुआ है। दूरदर्शन को दिए विशेष साक्षात्कार में आरबीआई गवर्नर ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संभावित कमजोर मानसून को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बताया।
मल्होत्रा ने अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच रुपए के प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा, "पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद डॉलर मजबूत हुआ है। कई देशों की मुद्राएं कमजोर हुई हैं। अगर वैश्विक स्तर पर देखें तो भारतीय रुपए की स्थिति सामान्य मानी जा सकती है।"
उन्होंने कहा कि मजबूत सेवा निर्यात, प्रवासी भारतीयों से होने वाली आय, रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और नए व्यापार समझौतों के प्रभाव से भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत बना रहेगा और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
आरबीआई गवर्नर ने सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए सरकार के हालिया कदमों, सेवा निर्यात और रेमिटेंस में वृद्धि, ब्रिटेन के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) तथा यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम देश के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) को मजबूत करने में मदद करेंगे।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं और नीति-निर्माताओं को फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति अपनानी चाहिए। महंगाई का जिक्र करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिलहाल महंगाई लगभग 4 प्रतिशत के स्तर पर है और हालिया मूल्य दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़े कारणों की वजह से रहे हैं।
आरबीआई ने इस वर्ष अब तक अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखी है, ताकि आर्थिक वृद्धि और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी आई है। होरमुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही भी लगभग ठप हो गई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव पड़ सकता है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में खुदरा महंगाई (सीपीआई) 4.38 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दर्ज की गई है। यह महंगाई दर आरबीआई के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर है, जिसका मध्य बिंदु 4 प्रतिशत है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हेडलाइन सीपीआई महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत रखा है, जिसे पहले के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से बढ़ाया गया है। यह संशोधित अनुमान पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव के बढ़ते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है।
आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होगी, जिसमें मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करते हुए प्रमुख ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा।
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