राजनीति
हिंसक प्रदर्शन करने वालों की खैर नहीं! प्रधानमंत्री मेलोनी का बड़ा फैसला, अब बच्चों की तोड़फोड़ का हर्जाना भरेंगे माता-पिता
Shubhra Nandy
21 Oct 2026 7:37 AM IST

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सरकार ने लागू किए कड़े नियम
रोम : इटली में हिंसक विरोध प्रदर्शनों, तोड़फोड़ और लूटपाट की बढ़ती घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को नए सुरक्षा प्रावधानों को मंजूरी दे दी। इसके तहत सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में शामिल लोगों को पांच साल तक की जेल और अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर तोड़फोड़ या लूटपाट में नाबालिग शामिल पाए जाते हैं, तो उनके माता-पिता को भी आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। सरकार का यह फैसला इटली की आर्थिक राजधानी मिलान सहित उत्तरी शहरों में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद आया है। इन घटनाओं में दुकानों के शीशे तोड़े गए, लूटपाट हुई और पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर किया जाएगा।
मेलोनी बोलीं- तोड़फोड़ और चोरी कोई क्रांतिकारी काम नहीं
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने नए सुरक्षा नियमों की जानकारी देते हुए हिंसक प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ करना और चोरी करना किसी तरह का क्रांतिकारी कार्य नहीं है। ऐसी गतिविधियां विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य हैं। मेलोनी के अनुसार, नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों की सुरक्षा खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार ने संकेत दिया है कि हिंसक भीड़ और संगठित तोड़फोड़ की घटनाओं को रोकने के लिए नए प्रावधानों का सख्ती से इस्तेमाल किया जाएगा।
पांच या अधिक लोगों के समूह में हिंसा करने पर सजा
नए कानून के तहत प्रदर्शन के दौरान कम से कम पांच लोगों के समूह में शामिल होकर पत्थर, डंडे या अन्य वस्तुओं के जरिए सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में अधिकतम पांच साल की कैद और 20 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरा ढका हो या हिंसा से किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंची हो, तो सजा और बढ़ सकती है। समूह बनाकर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ करने वालों के लिए भी दंड सख्त किए गए हैं। यह प्रावधान सामान्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों पर स्वतः लागू नहीं होता, बल्कि निर्दिष्ट हिंसक गतिविधियों और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले व्यवहार से संबंधित है।
नाबालिग बच्चों की गलती की कीमत माता-पिता को चुकानी होगी
नए सुरक्षा पैकेज का सबसे चर्चित पहलू नाबालिगों द्वारा की गई तोड़फोड़ और लूटपाट से संबंधित है। सरकार ने निर्णय लिया है कि यदि किसी नाबालिग के कारण सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उसके माता-पिता पर आर्थिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने बताया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने की स्थिति में प्रशासन नुकसान की भरपाई का आदेश जारी कर सकेगा। यदि किसी दुकान, वाहन या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो संबंधित मालिक अदालत के माध्यम से मुआवजे का आदेश प्राप्त कर सकता है। सरकार का कहना है कि इससे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की जवाबदेही बढ़ेगी और हिंसा को रोकने में मदद मिलेगी।
14 से 17 साल के युवाओं को भी हिरासत में लेने का प्रावधान
इटली सरकार ने पुलिस की निवारक हिरासत संबंधी शक्तियों का विस्तार भी किया है। नए नियमों के तहत 14 से 17 वर्ष की उम्र के ऐसे युवाओं को भी सीमित अवधि के लिए हिरासत में लिया जा सकेगा, जिनके संबंध में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा होने के प्रमाण मौजूद हों। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में पुलिस ऐसे युवाओं को 12 घंटे तक पुलिस स्टेशन में रोक सकती है, भले ही उन्होंने उस समय कोई अपराध न किया हो। इससे पहले इस तरह की निवारक कार्रवाई मुख्य रूप से वयस्कों के लिए उपलब्ध थी। इस प्रावधान को लेकर नागरिक अधिकारों और पुलिस शक्तियों की सीमा पर बहस भी शुरू हुई है।
मिलान की सड़कों पर तैनात होंगे 500 सैनिक
हिंसक प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए सरकार ने मिलान में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पुलिस की सहायता के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाएंगे। इन सैनिकों को वर्ष 2026 के अंत तक मिलान में तैनात रखने की योजना है। वे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, संवेदनशील क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा में सहयोग करेंगे। सरकार को आगामी शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान फिर से हिंसा और लूटपाट की आशंका है। सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और संभावित उपद्रव को रोकने के लिए तैयारियां कर रही हैं।
मिलान में दुकानों में लूटपाट और पुलिस पर हमले
इटली के उत्तरी शहरों में हालिया प्रदर्शन शुरुआत में बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति और आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में हुए थे। लेकिन कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। मिलान में युवाओं के समूहों पर दुकानों में तोड़फोड़, सामान लूटने और पुलिसकर्मियों पर हमले करने के आरोप लगे। इन घटनाओं ने शहर की कानून-व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया। हिंसा की घटनाओं के बाद सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ा और नए प्रावधानों को मंजूरी दी गई।
2022 से लगातार सख्त कानून ला रही मेलोनी सरकार
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अक्टूबर 2022 में सत्ता में आई थीं। इसके बाद से उनकी सरकार सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए कई नए प्रावधान लागू कर चुकी है। वर्ष 2025 में भी सरकार ने सड़कें अवरुद्ध करने, अवैध कब्जे और जेलों में हिंसक घटनाओं से संबंधित नियमों को सख्त किया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इटली की जेलों में बंद कैदियों की संख्या 17 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। इस बढ़ोतरी और नए कानूनों को लेकर कानूनी विशेषज्ञों तथा नागरिक अधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
आलोचकों ने उठाए सवाल, क्या सिर्फ सख्ती से रुकेगी हिंसा?
इटली सरकार के इन फैसलों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि केवल सजा बढ़ाने और पुलिस को अतिरिक्त अधिकार देने से हिंसक घटनाओं के पीछे मौजूद आर्थिक तथा सामाजिक कारणों का समाधान नहीं होगा। उनका तर्क है कि बेरोजगारी, महंगाई, कम आय और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर बढ़ते असंतोष पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा, दुकानदारों की संपत्ति और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
महंगाई और डीजल की कीमतों से भी बढ़ा असंतोष
इटली में सुरक्षा संबंधी फैसले ऐसे समय लिए गए हैं, जब देश के कई हिस्सों में महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दक्षिणी इटली में ट्रक चालकों ने डीजल की कीमतों और बढ़ते खर्च के विरोध में प्रदर्शन किए हैं। सड़कें अवरुद्ध होने से सामान की आपूर्ति प्रभावित हुई है। कुछ पास्ता उत्पादक कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा, जबकि कृषि संगठनों ने फल और सब्जियों के खराब होने की आशंका जताई है। सरकार ने परिवहन कंपनियों को अतिरिक्त सहायता देने का भरोसा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून-व्यवस्था के साथ आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।
नए सुरक्षा कानून पर आगे क्या होगा?
इटली सरकार ने सुरक्षा संबंधी आपात डिक्री को मंजूरी दी है, जिसके प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। हालांकि, संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, इस डिक्री को स्थायी कानून बनाए रखने के लिए संसद की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा निर्धारित है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य हिंसक घटनाओं को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं, विरोधियों की चिंता है कि निवारक हिरासत और कठोर दंड के प्रावधानों का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर भी असर पड़ सकता है। अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए नियमों को किस तरह लागू किया जाता है और इटली के शहरों में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है।
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