- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Chanakya Niti: इन 3...
धर्म-अध्यात्म
Chanakya Niti: इन 3 बातों में न करें शर्म, वरना जीवन भर भुगतना पड़ेगा नुकसान
Harrison
13 Oct 2025 9:11 PM IST

x
Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म : प्राचीन भारत के महान अर्थशास्त्री, राजनयिक और नीतिशास्त्र के अग्रणी चिंतक आचार्य चाणक्य की नीतियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके समय में थीं। उनकी लिखी ‘चाणक्य नीति’ न केवल राजनीति और कूटनीति की दिशा तय करती है, बल्कि सामान्य जीवन के लिए भी मार्गदर्शक है। चाणक्य ने जीवन की सफलता के लिए कुछ स्पष्ट नियम बताए हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि तीन बातों में कभी भी शर्म नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन तीन बातों में संकोच करता है, तो उसे जीवन में ऐसा नुकसान उठाना पड़ सकता है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होती।
चाणक्य की दृष्टि में शर्म कहां नहीं करनी चाहिए?
चाणक्य नीति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ज्ञान, चिकित्सा और धन मांगने जैसी तीन स्थितियाँ ऐसी हैं, जहां शर्म करना व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल हो सकती है। आइए जानें इन तीनों के पीछे छिपा गहरा तात्पर्य:
ज्ञान प्राप्ति में शर्म नहीं
आचार्य चाणक्य कहते हैं:
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।”
अर्थात् — ज्ञान से बढ़कर इस संसार में कुछ भी पवित्र नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति किसी विषय को नहीं जानता और फिर भी केवल दूसरों की सोच के डर से सवाल पूछने में हिचकता है, तो वह अंधकार में ही बना रहता है।
ज्ञान प्राप्त करने के लिए उम्र, स्थान या परिस्थिति की कोई सीमा नहीं होती। जो व्यक्ति झिझक छोड़कर ज्ञान प्राप्त करता है, वही आगे बढ़ता है।
चिकित्सा के समय न करें संकोच
बीमारी को छुपाना या डॉक्टर से अपनी तकलीफ न बताना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
चाणक्य के अनुसार, जब तक व्यक्ति अपने रोग के बारे में खुलकर नहीं बताएगा, तब तक उसका सही इलाज नहीं हो पाएगा।
शर्म या झिझक के कारण कई बार बीमारियाँ गंभीर रूप ले लेती हैं, और समय रहते उपचार न मिलने पर जान का भी खतरा हो सकता है।
आवश्यकता पड़ने पर धन मांगने में न करें हिचक
चाणक्य नीति में लिखा गया है:
"धनमूलं इदं जगत्",
अर्थात – यह संसार धन पर आधारित है।
यदि किसी कठिन समय में आपको धन की आवश्यकता है और आपके पास कोई संबंधी या मित्र है जो मदद कर सकता है, तो वहां संकोच करना स्वाभिमान नहीं, बल्कि मूर्खता है। चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने अहम के कारण मदद नहीं मांगता, वह जीवन में और अधिक संकट झेलता है। जरूरत के समय सही जगह पर मदद मांगना बुद्धिमानी है, न कि कमजोरी।
वर्तमान संदर्भ में क्यों है ये नीति जरूरी?
आज के समाज में इगो, डर और सामाजिक दबाव के चलते लोग न तो सवाल पूछते हैं, न ही डॉक्टर से पूरी बात साझा करते हैं और न ही समय पर मदद मांगते हैं। बच्चे स्कूल में सवाल पूछने से डरते हैं, युवा मानसिक स्वास्थ्य पर बात करने से शर्माते हैं, और जरूरतमंद लोग रिश्तों में कड़वाहट के डर से सहायता मांगने से हिचकते हैं।
चाणक्य नीति केवल नीति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। ज्ञान मांगना, इलाज करवाना और जरूरत पर धन या मदद मांगना — इन तीन बातों में शर्म नहीं, समझदारी होनी चाहिए।जो इन बातों को समय रहते समझ जाता है, उसका जीवन सरल, सुरक्षित और सफल हो सकता है। लेकिन जो व्यक्ति झूठे अहंकार या शर्म में उलझा रहता है, उसे अंततः असफलता और पछतावे का सामना करना पड़ता है।
Tagsचाणक्य नीतिबातोंशर्मजीवनभुगतनाChanakya Nitisayingsshamelifesufferingजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newsSamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





