धर्म-अध्यात्म

कदुआ भात से होती है Chhath Mahaparv की शुरुआत, ‘नहाए-खाए’ पर सभी को भेजें शुभकामनाओं के संदेश

Harrison
24 Oct 2025 7:09 PM IST
कदुआ भात से होती है Chhath Mahaparv की शुरुआत, ‘नहाए-खाए’ पर सभी को भेजें शुभकामनाओं के संदेश
x
Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : लोकआस्था का महान पर्व छठ पूजा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हो गया है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अद्भुत प्रतीक है। छठ की शुरुआत ‘नहाए-खाए’ से होती है, जिसमें महिलाएँ और पुरुष साफ-सफाई के साथ शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। इसी दिन घरों में कदुआ भात (कद्दू की सब्जी और चने की दाल के साथ चावल) बनाकर खाया जाता है, जिससे इस पर्व का पवित्र आगाज़ होता है।
नहाए-खाए: पवित्रता का पहला चरण
छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाए-खाए’ कहलाता है। इस दिन व्रती (उपवास करने वाले) सुबह गंगा या किसी पवित्र नदी, तालाब या पोखरे में स्नान करते हैं। स्नान के बाद वे घर लौटकर शुद्धता और सादगी के साथ भोजन तैयार करते हैं। कदुआ भात — यानी लौकी या कद्दू की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल — शुद्ध घी में बनाया जाता है।
भोजन में लहसुन, प्याज या मसालों का प्रयोग नहीं किया जाता। इस दिन व्रती केवल यही भोजन ग्रहण करते हैं और इसके बाद अगले चार दिनों तक फलाहार और निर्जला उपवास का पालन करते हैं।
श्रद्धा और सफाई का प्रतीक पर्व
छठ पूजा न केवल सूर्य देव की उपासना है, बल्कि यह शुद्धता, संयम और पर्यावरण प्रेम का भी संदेश देती है। व्रती महिलाएँ इस पर्व को पूरी निष्ठा और तपस्या के साथ निभाती हैं। घरों, गलियों और घाटों की सफाई की जाती है। हर जगह स्वच्छता, श्रद्धा और उत्सव का माहौल छाया रहता है।
भक्तों ने शुरू की तैयारियाँ
‘नहाए-खाए’ के साथ ही घरों में छठ की तैयारियाँ तेज हो जाती हैं। बाजारों में ठेकुआ, गुड़, गन्ना, नारियल, केला और अन्य प्रसाद सामग्री की खरीदारी जोरों पर रहती है। नदी घाटों की सजावट की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की जा रही है ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पूजा संपन्न कर सकें।
चार दिनों का यह पर्व
छठ पूजा कुल चार दिनों तक चलती है —
पहला दिन: नहाए-खाए
दूसरा दिन: खरना या लोहंडा
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य)
चौथा दिन: उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य)
हर दिन का अपना धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा शरीर और मन की ऊर्जा को शुद्ध करती है तथा प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखने का संदेश देती है।
शुभकामनाओं के संदेशों की बौछार
‘नहाए-खाए’ के दिन से ही लोग एक-दूसरे को छठ पर्व की शुभकामनाएँ भेजने लगते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शुभकामनाओं के संदेशों की बाढ़ आ जाती है —
“कदुआ भात से हुई छठ की शुरुआत,
सूर्य देव दें सुख-समृद्धि की सौगात।”
लोग अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को बधाई देते हुए सूर्य भगवान से उनके जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
छठ का सार
छठ पर्व भारतीय संस्कृति में स्त्री शक्ति और पर्यावरण के संतुलन का प्रतीक है। यह त्योहार बताता है कि जब मनुष्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करता है, तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि स्वतः आती है।
इस प्रकार, कदुआ भात से शुरू होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक छठ पूजा भक्ति, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत उदाहरण बन जाती है।
छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!
“जय छठी मइया!”
Next Story