धर्म-अध्यात्म

Chhath Puja: 4 दिनों की विधि और पर्व मनाने की पूरी जानकारी

Tara Tandi
23 Oct 2025 6:19 PM IST
Chhath Puja: 4 दिनों की विधि और पर्व मनाने की पूरी जानकारी
x
Chhath Puja ज्योतिष न्यूज़: इस साल अक्टूबर का महीना त्योहारों से भरा है। करवा चौथ, दिवाली, भाई दूज और गोवर्धन पूजा के बाद, छठ का सभी को बेसब्री से इंतज़ार है। छठ एक भव्य त्योहार है जिसमें पूरा भारत छठी मैया की भक्ति भाव से पूजा और वंदना करता है। इस साल छठ कब शुरू होगा? नहाय खाय, खरना, सूर्य और संध्या अर्घ्य कब हैं? आज के लेख में हम इन्हीं सवालों के जवाब देंगे। जैसे-जैसे छठ नजदीक आता है, सभी को अपने घर की याद आती है। इस साल छठ 25 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ शुरू होगा और 28 अक्टूबर, 2025 को सूर्य अर्घ्य के साथ समाप्त होगा। यह त्योहार बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित
पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
छठ कब है (छठ पूजा 2025 तिथि)
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, छठ कार्तिक मास (कार्तिक माह 2025) के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है। यह पर्व नहाय खाय से शुरू होकर उषा अर्घ्य के साथ समाप्त होता है।
नहाय खाय 2025, शनिवार, 25 अक्टूबर 2025
खरना पूजा 2025, रविवार, 26 अक्टूबर 2025
संध्या अर्घ्य 2025, सोमवार, 27 अक्टूबर 2025
उषा अर्घ्य 2025, मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025
नहाय खाय पर क्या होता है?
छठ पर्व नहाय खाय से शुरू होता है। इस वर्ष नहाय खाय 25 अक्टूबर को है। इस दिन व्रती महिलाएं सुबह स्नान करके भगवान की पूजा करती हैं। इसके बाद, वे कद्दू या लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल खाती हैं।
खरना पर क्या होता है?
खरना के दिन, व्रती महिलाएं शाम को साफ बर्तनों और चूल्हे में गुड़ की खीर बनाती हैं। महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं। शाम को छठी मैया को गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाकर उसे ग्रहण किया जाता है। खरना के दौरान साफ़-सफ़ाई के साथ-साथ पवित्रता भी बनाए रखी जाती है। इसके अलावा, तामसिक भोजन वाले बर्तनों का उपयोग नहीं किया जाता है।
सूर्य अर्घ्य पर क्या होता है?
छठ के दिन सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन घाटों पर छठी मैया की पूजा के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन ठेकुआ, नारियल, फल, मिठाई और अन्य कई चीज़ें एक टोकरी में रखकर छठ घाट पर ले जाई जाती हैं।
उषा अर्घ्य के दिन क्या होता है?
उषा अर्घ्य के दिन, लोग सूर्योदय से पहले छठ घाट पर टोकरी लेकर सूर्य के उदय होने की प्रतीक्षा करते हैं। सूर्योदय के समय, व्रती महिलाएं उगते सूर्य को टोकरी अर्पित करके अपना व्रत तोड़ती हैं। छठ व्रत के दौरान महिलाएं 36 घंटे का उपवास रखती हैं। हिंदू धर्म में इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।
छठ पूजा का महत्व (छठ पूजा 2025 महत्व)
छठ पूजा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे लोक आस्था का महापर्व भी कहा जाता है। छठ की उत्पत्ति का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, रामायण काल ​​में माता सीता और भगवान राम ने भी छठ व्रत रखा था और भगवान सूर्य की पूजा की थी। महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट हार गए थे, तब द्रौपदी ने भी छठ व्रत रखा था।
Next Story