धर्म-अध्यात्म

Kartik Purnima 2025: स्नान-दान मुहूर्त व दीपदान का महत्व

Harrison
4 Nov 2025 6:49 PM IST
Kartik Purnima 2025: स्नान-दान मुहूर्त व दीपदान का महत्व
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 2025 को हिंदू पंचांग के अनुसार बुधवार, 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।

पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को रात 10:36 बजे आरंभ होगी और 5 नवंबर को शाम 6:48 बजे समाप्त होगी।
विधान के अनुसार, यदि पूर्णिमा तिथि सुबह के समय बनी हो, तो उस दिन को व्रत-उत्सव के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसीलिए इस बार 5 नवंबर को ही कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य रूप से पालन होगा।
इसका महत्व और धार्मिक पृष्ठभूमि
कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दौरान:
यह दिन विशेष रूप से देव दीपावली (“देवताओं की दीपावली”) के रूप में भी मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवताएँ पवित्र घाटों पर स्नान करने आती हैं और दीप-दान करती हैं।
इसे त्रिपुरासुर वध (जिसमें शिव ने त्रिपुरा दैत्य का नाश किया था) से जोड़कर देखा गया है।
साथ ही, यह दिन विष्णु के पहले अवतार (मछली मत्स्य) से भी जुड़ा माना जाता है।
इस प्रकार, कार्तिक पूर्णिमा स्नान-दान-दीपदान द्वारा आत्मशुध्दी, पुण्यप्राप्ति और जीवन में उजाला लाने का प्रतीक है।
स्नान, दान व दीपदान का शुभ मुहूर्त
इस पावन दिन पर विशेष क्रियाएँ साथ-साथ की जाती हैं — जैसे पवित्र नदी में स्नान, दान-दान, दीपदान। इनके लिए शुभ समय (मुहूर्त) निम्नलिखित हैं:
स्नान मुहूर्त: सूर्योदय के बाद से लेकर लगभग 5:44 प्रातः तक।
दान मुहूर्त: सूर्योदय से लगभग शाम 5:12 के आसपास तक।
दीपदान (दीप प्रज्वलित करना): शाम 5:15 से 7:50 बजे तक (प्रदोषकाल) का समय विशेष माना गया है।
अन्य मुहूर्त जैसे ब्रह्म मुहूर्त, विजय मुहूर्त-गोधूलि मुहूर्त भी बताए गए हैं।
इन मुहूर्तों में नहाना, दान-दान करना तथा लाखों दीप जलाना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से यदि गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान संभव न हो, तो घर में गंगाजल से स्नान कर लेना भी पर्याप्त माना जाता है।
पूजा-विधि और क्या करें?
सुबह जल्दी उठें, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, या घर में गंगाजल लेकर स्नान-शुद्धि करें।
स्नान के बाद भगवान विष्णु, लक्ष्मी, शिव एवं पार्वती की पूजा करें। दीपक जलाएं, फूल-फळ अर्पित करें।
दान करें — जैसे जरूरतमंदों को कपड़े, खाद्य सामग्री, किताबें या अन्य उपकार। दान को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शाम को दीपदान करें: घर, घाट, तट पर दीये जलाएं, विशेष रूप से तुलसी के समीप एवं मंदिर परिसर में। यह घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
क्यों करें? लाभ क्या हैं?
यह दिन पापों को नष्ट करने, आत्मा के शुद्धिकरण व ईश्वर-भक्ति की भावना को बढ़ावा देने का माना जाता है।
दीपदान करने से अंधकार मिटने, जीवन में प्रकाश-समृद्धि आने का प्रतीक माना जाता है।
दान-दान, स्नान एवं पूजा से समाज-सेवा व मानव-सम्पर्क बढ़ता है, जिससे धार्मिक व सामाजिक रूप से लाभ होता है।
कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व हमें बताता है कि उजाले की ओर कदम बढ़ाना, नहाकर-शुद्ध हो जाना, दूसरों को सहारा देना व अपने जीवन में दीप जलाना — ये सब मिलकर हम-आपके, हमारे परिवार-समाज और ईश्वर-भक्ति के रिश्ते को मजबूत करते हैं। इस वर्ष 5 नवंबर को इस पावन दिन का भरपूर लाभ उठाएँ, स्नान-दान-दीपदान करके अपने जीवन में नवीन ऊर्जा लाएँ।
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