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धर्म-अध्यात्म
Shiv के आंसुओं से जुड़ी रहस्यमयी कथा, पाकिस्तान में मौजूद पवित्र जलधारा
Tara Tandi
3 Jun 2025 7:26 PM IST

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Shiv Temple ज्योतिष न्यूज़: भारत में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं, इसके अलावा दुनिया के कई हिस्सों में भी उनके मंदिर स्थापित हैं, जहां भोले के भक्त उनकी पूजा करते हैं। ऐसा ही एक मंदिर पाकिस्तान में भी मौजूद है। कथाओं के अनुसार, माता सती के अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ कुंड में लीन होने के बाद भोलेनाथ दुखी हो गए थे। वे इतने व्याकुल हो गए थे कि उनके आंसुओं से एक विशाल तालाब बन गया था।
कहां है यह मंदिर?
पाकिस्तान का लगभग 5000 साल पुराना कटासराज मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर महाभारत काल का बताया जाता है। यह पाकिस्तान के चकवाल जिले से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस परिसर में सात अन्य देवताओं के मंदिर भी बने हुए हैं, जिन्हें सतग्रह के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में न केवल भगवान शिव हैं, बल्कि पांडवों ने भी अपना अज्ञातवास यहीं बिताया था।
ये देवता भी हैं मंदिर में मौजूद
कटास राज मंदिर एक विशाल परिसर है, जिसमें कई मंदिर और स्मारक हैं। मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसमें एक शिवलिंग है। परिसर में अन्य मंदिर भगवान विष्णु, भगवान गणेश और देवी दुर्गा को समर्पित हैं। कटास राज मंदिर हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। हर साल हजारों हिंदू भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।
कटास मंदिर से जुड़ी कहानी
कटास राज मंदिर एक विशाल तालाब के चारों ओर बना है। यह भगवान शिव के आंसुओं से बना है। कहानियों के अनुसार, भगवान शिव अपनी पत्नी सती के साथ यहां रहते थे। माता सती के अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ कुंड में डूबने के बाद, भगवान शिव अपने आंसू नहीं रोक पाए। वे इतना रोए कि उनके आंसुओं से एक तालाब बन गया। भगवान शिव के आंसुओं के कारण ही इस मंदिर का नाम कटास पड़ा।
पांडवों ने वनवास का कुछ समय यहीं बिताया था
महाभारत काल के दौरान, जुए में सब कुछ हारने के बाद पांडव भाई अपने 12 साल के वनवास के दौरान यहां रहे थे। इससे जुड़ी एक प्रचलित कहानी यह है कि जब जंगलों में भटकते हुए पांडवों को प्यास लगी, तो उनमें से एक कटाक्ष कुंड के पास पानी लेने आया। उस समय यह कुंड यक्ष के नियंत्रण में था। उन्होंने पानी लेने आए पांडवों से कहा कि अगर वे उनके सवाल का जवाब दें तो ही उन्हें पानी दें। जब उन्होंने जवाब नहीं दिया तो यक्ष ने उन्हें बेहोश कर दिया। इस तरह एक-एक करके सभी पांडव आए और बेहोश हो गए। अंत में युधिष्ठिर ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया और सभी सवालों के सही जवाब दिए। यक्ष युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने पांडवों को होश में लाकर पानी पीने की अनुमति दे दी।
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