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धर्म-अध्यात्म
Dhanteras ही नहीं, इन सात मौकों पर झाड़ू खरीदना लाता है शुभता और समृद्धि
Harrison
18 Oct 2025 8:46 PM IST

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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : त्योहारों के दौरान सिर्फ सोना‑चाँदी या नए बर्तन ही नहीं, बल्कि एक साधारण वस्तु — झाड़ू (झाड़ / झाड़ीचान) — भी विशेष महत्व रखती है। विशेष रूप से Dhanteras (धनत्रयोदशी) के अवसर पर इसे खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह घर से नकारात्मक ऊर्जा मिटाने, और माँ Lakshmi की वासना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
हालाँकि, वास्तु शास्त्र और धार्मिक रीतियों में झाड़ू खरीदने के सात अन्य अवसर भी बताए गए हैं — इन अवसरों पर झाड़ू लेना समाज में समृद्धि, शुद्धता और सौभाग्य का संकेत माना जाता है।
1. धनतेरस (Dhanteras) के दिन
धनतेरस पूर्वाभास‑दिवाली का पहला दिन है। इस दिन नया सामान — विशेषकर धातु‑वस्तुएँ और घरेलू उपकरण — खरीदने का विधान है। झाड़ू खरीदने का कारण ये है कि कहा जाता है: “स्वच्छ घर में माँ लक्ष्मी वास करती हैं, इसलिए झाड़ू से पोंछा गया घर धन‑वैभव के लिए तैयार होता है।”
2. नए घर प्रवेश (गृहप्रवेश) के समय
जब कोई व्यक्ति नए घर में प्रवेश करता है, उस समय झाड़ू लाकर ‘सफाई’ का प्रतीक स्थापित करना शुभ माना जाता है। इससे माना जाता है कि नए घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं बचेगी और घर में समृद्धि बनी रहेगी।
3. घर में वित्तीय संकट से मुक्ति के समय
जिन परिवारों को कर्ज‑दशा, आर्थिक कठिनाई या व्यवसाय में मंदी का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें सलाह दी जाती है कि नए‑साफ झाड़ू लाएँ। ऐसा करने से प्रतीक रूप में “पुरानी बाधाओं को झाड़ने” का कार्य होता है।
4. संक्रमण या बीमारी के बाद घर की सफाई के समय
घर में बीमारी या संक्रमण के बाद पूरी तरह सफाई‑सम्भाल करने का अच्छा अवसर होता है, और इस समय नया झाड़ू लाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इससे प्रतीकात्मक रूप से बुरी स्वास्थ्य‑स्थिति को पीछे छोड़ने का संकल्प होता है।
5. किसी प्रमुख सामाजिक‑धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व
अगर घर में कोई शादी‑अनुष्ठान, पूजा‑कार्य या मैत्री‑समारोह होने वाला हो, तो उससे पहले झाड़ू लाकर घर को तैयार करना शुभ माना जाता है। इससे सामाजिक‑सम्बंध और स्वागत‑भाव में सकारात्मकता आती है।
6. पंचक, अमावस्या या विशेष व्रत समाप्ति के बाद
जगत के अनुसार कुछ काल या दिन जैसे पंचक, अमावस्या आदि विषम माने जाते हैं, और इन दिनों के बाद क्लीन‑अप के रूप में नया झाड़ू लाना शुभ होता है।
7. पुरानी झाड़ू पूरी तरह टूट‑फूट जाने पर तुरंत परिवर्तन के समय
जब झाड़ू पुराना, टूटे‑फटे या काम न करने वाला हो जाए, उसे तुरंत हटाना और नया लाना शुभ माना जाता है। ऐसा प्रतीक‑रूप से माना जाता है कि पुरानी बाधाएं हटें और नई सकारात्मक शुरुआत हो।
वास्तु‑नुसार प्रयोग और दिशा‑निर्देश
झाड़ू लेने के बाद इसे पूजा‑स्थल में माँ लक्ष्मी व भगवान Kubera की आराधना करके घर में लाएँ।
झाड़ू को घर में पश्चिम या उत्तर‑पश्चिम की कोने में लेटाकर (उपरीअवस्थिति में नहीं) रखा जाना चाहिए। अगर खड़ा रखेंगे तो धन व सौभाग्य बह सकता है।
झाड़ू को खुली‑दिखने वाली जगह, घर के उत्तर‑पूर्व दिशा या पूजा‑कमरे में नहीं रखा जाना चाहिए।
पुराने झाड़ू को तुरंत बदलें; उसे घर में फेंकना‑उछालना व रात में उसका उपयोग करना मनहूस माना जाता है।
समय‑सारणी
झाड़ू लेने के सर्वश्रेष्ठ दिन : धनतेरस, नए प्रवेश के दिन, बीमारी के बाद, सामाजिक‑पूजा से पूर्व, व्रत‑विशेष के बाद।
वर्जित समय : सोमवार, शनिवार‑रात्रि, अमावस्या‑दिन आदि में झाड़ू खरीदना शुभ नहीं माना जाता।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की प्रथा केवल परंपरागत रीति नहीं, बल्कि पुरानी मान्यताओं का प्रतीक है — “स्वच्छता में धन का वास”, “बाधाओं को झाड़ने” और “नए आरंभ की क्षमता”। अगर आप इन सात अवसरों में से किसी पर अपनी झाड़ू‑खरीदारी करें, और उसे सही दिशा‑नियम सहित रखें, तो माना जाता है कि माँ लक्ष्मी का वास हो, धन‑संपदा बनी रहे और परिवार‑सदस्य स्वस्थ व सुखी रहें।
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