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धर्म-अध्यात्म
Kartik मास में करें ये आरती, मिलेगी विष्णु-लक्ष्मी जी की विशेष कृपा
Harrison
15 Oct 2025 6:33 PM IST

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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: कार्तिक मास में करें ये आरती, प्रभु श्रीहरि के साथ मिलेगी मां लक्ष्मी की कृपा हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास को अत्यंत पुण्यदायक और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। यह महीना देवताओं के पूजन, व्रत-उपवास और पुण्य कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। विशेष रूप से इस मास में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस मास में नियमपूर्वक आरती करने से व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है।
कार्तिक माह की शुरुआत शरद पूर्णिमा के बाद होती है और इसकी समाप्ति देवउठनी एकादशी तक होती है। इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और सारे मांगलिक कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं। इसलिए यह पूरा महीना पूजा-पाठ, दान और साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
कार्तिक में क्यों है भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा का महत्व?
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि कार्तिक माह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस मास में तुलसी पूजन, दीपदान, गंगा स्नान, व्रत और आरती से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। वहीं मां लक्ष्मी को भी दीपोत्सव का यह महीना विशेष प्रिय होता है। दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, अन्नकूट और देवउठनी एकादशी जैसे पर्व इस माह की धार्मिकता को और भी बढ़ाते हैं। रोज करें यह आरती, मिलेगा विशेष पुण्य
अगर आप कार्तिक मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की संयुक्त आरती करते हैं, तो न केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है। नीचे दी गई आरती को आप रोज सुबह या शाम दीपक जलाकर श्रद्धा भाव से करें:
श्री हरि आरती (विष्णु जी के लिए)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
मां लक्ष्मी आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
इन आरतियों के साथ अगर आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रीसुक्त का पाठ भी करते हैं, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
कब और कैसे करें आरती?
समय: सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त के समय आरती करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
स्थान: घर के पूजास्थल में साफ-सफाई के बाद ही पूजा करें।
सामग्री: घी का दीपक, फूल, अक्षत, चंदन, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
भाव: आरती करते समय भगवान के प्रति पूर्ण श्रद्धा और समर्पण का भाव रखें।
अन्य धार्मिक गतिविधियाँ जो कार्तिक में करें
प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं।
विष्णु और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें।
गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें या स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दीपदान करें।
कार्तिक मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और सुख, शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह मास आत्मिक शुद्धि और अध्यात्म की ओर बढ़ने का श्रेष्ठ अवसर होता है। अतः इस पवित्र समय का लाभ उठाते हुए नियमपूर्वक आरती और पूजा अवश्य करें।
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