धर्म-अध्यात्म

Bhagwan Vishnu की गुरूवार पूजा: महत्व, धार्मिक मान्यता और लाभ

Tara Tandi
21 Aug 2025 6:50 PM IST
Bhagwan Vishnu की गुरूवार पूजा: महत्व, धार्मिक मान्यता और लाभ
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Bhagwan Vishnu ज्योतिष न्यूज़ : शास्त्रों के अनुसार, गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। कहा जाता है कि इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन बृहस्पति ग्रह की शांति के उपाय किए जाते हैं। भगवान विष्णु बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए पीली चीजों का अधिक प्रयोग करना चाहिए, जैसे कैला, बेसन के लड्डू, पीले चावल आदि। आइए जानते हैं कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व है-
गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा क्यों की जाती है? हिंदू धर्म के अनुसार, हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित होता है, उसी प्रकार गुरुवार को विष्णु जी का विशेष दिन माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि पक्षियों में विशेष गरुड़ देव ने गुरुवार के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया था और उन्हें विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। उसी दिन से, गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे शुभ दिन माना जाने लगा।
गुरुवार को पूजा का महत्व: ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान बृहस्पति का व्रत रखना शुभ माना जाता है। गुरुवार के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है। शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में गुरुवार व्रत होता है, वहाँ महालक्ष्मी का वास होता है और घर में आर्थिक समस्याएँ नहीं आतीं।
गुरुवार व्रत पूजा विधि: गुरुवार के दिन पूजा के समय भगवान विष्णु को हल्दी, चने की दाल, पीले वस्त्र, गुड़, नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। इस दिन पूजा करते समय या अन्य किसी भी प्रकार से पीले वस्त्र धारण करने और वस्त्र दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। व्रत के दिन सुबह उठकर स्नानादि करके घर के मंदिर में जाकर भगवान को स्नान कराएँ और उन्हें चावल और पीले फूल अर्पित करें।
तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ी हल्दी डालें और भगवान विष्णु या केले के पेड़ की जड़ को स्नान कराएँ। अब उस लोटे में गुड़ और चने की दाल डालकर रख दें। यदि आप केले के पेड़ की पूजा कर रहे हैं, तो उस पर यह जल डालें और यदि आप भगवान विष्णु की पूजा कर रहे हैं, तो पूजा के बाद यह जल पौधों में डालें।
अब भगवान को हल्दी या चंदन का तिलक लगाकर पीले चावल चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ और कथा शुरू करें। कथा के बाद एक उपला लें, उसे गर्म करें और उस पर घी डालें और जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हो, उसमें हवन सामग्री अर्पित करें। साथ ही गुड़ और चना भी डालें। ऊँ गुं गुरुवाय नमः मंत्र का 5, 7 या 11 बार जाप करें और हवन पूरा होने के बाद भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करना न भूलें।
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