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परिवार से दूर रहकर ओलंपिक तक का सफर प्रणति नायक की संघर्ष
नई दिल्ली: भारतीय जिम्नास्ट प्रणति नायक ने अपनी खेल यात्रा से जुड़ी भावुक कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि किस तरह परिवार से दूर रहकर कठिन मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। एशियाई खेल 2026 से पहले प्रणति ने अपने सफर के उन पहलुओं को याद किया, जिन्होंने उन्हें एक सफल जिम्नास्ट बनने में मदद की।
प्रणति नायक का खेल करियर आसान नहीं रहा। जिम्नास्टिक जैसे खेल में सफलता हासिल करने के लिए छोटी उम्र से ही कड़ी ट्रेनिंग, शारीरिक मेहनत और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि इस सफर में कई बार उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ा और व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग करना पड़ा। भारतीय जिम्नास्टिक में प्रणति ने अपनी मेहनत से खास पहचान बनाई है। वह ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली चुनिंदा जिम्नास्टों में शामिल हैं। उनके प्रदर्शन ने देश में जिम्नास्टिक को लेकर लोगों की रुचि बढ़ाने में भी योगदान दिया है।
प्रणति ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि खेल में आगे बढ़ने के लिए लगातार मेहनत और धैर्य जरूरी होता है। कई बार खिलाड़ियों को ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जहां उन्हें परिवार, दोस्तों और सामान्य जीवन से दूरी बनानी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के कारण घर से दूर रहना भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण था। परिवार का समर्थन और विश्वास उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना रहा। जिम्नास्टिक में छोटी-छोटी गलतियां भी प्रदर्शन पर बड़ा असर डाल सकती हैं। इसलिए खिलाड़ियों को शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना पड़ता है। प्रणति ने भी अपने करियर में चोट, दबाव और प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना किया।
एशियाई खेल 2026 को लेकर प्रणति नायक की नजरें अब बेहतर प्रदर्शन पर हैं। वह अपनी तैयारी को मजबूत करने और देश के लिए अच्छा परिणाम हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण जरूरी है। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियां ही खिलाड़ियों को मजबूत बनाती हैं।
प्रणति नायक की कहानी उन खिलाड़ियों की कहानी भी है, जो खेल के लिए अपनी सुविधाओं और निजी जीवन से समझौता करते हैं। उनका सफर बताता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि लगातार प्रयास और त्याग भी जरूरी होता है। एशियाई खेल 2026 से पहले प्रणति का अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रहा है। वह अब अपने अनुभव और मेहनत के साथ भारतीय जिम्नास्टिक में नई उपलब्धियां हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
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