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KKR की अनोखी पहल! दुर्गा पूजा में दिखी बंगाल की सांस्कृतिक विरासत

Ratna Netam
19 Oct 2026 8:43 PM IST
KKR की अनोखी पहल! दुर्गा पूजा में दिखी बंगाल की सांस्कृतिक विरासत
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के अवसर पर क्रिकेट और सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम देखने को मिला है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने पारंपरिक कांथा कढ़ाई और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की है। कोलकाता के ऐतिहासिक इंडियन म्यूजियम में 'देवी दुर्गा: थ्रेड्स ऑफ डिविनिटी' नाम से आयोजित विशेष दुर्गा पूजा इंस्टॉलेशन के माध्यम से बंगाल की समृद्ध कला, संस्कृति और महिला कारीगरों की प्रतिभा को प्रदर्शित किया गया है।इस आयोजन में केकेआर ने 'SHE कांथा' के साथ मिलकर पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान देने का प्रयास किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल दुर्गा पूजा की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि महिला कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के अवसर विकसित करना भी है।
इंडियन म्यूजियम में पहली बार दुर्गा पूजा पंडाल
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कोलकाता के प्रतिष्ठित इंडियन म्यूजियम परिसर में पहली बार दुर्गा पूजा पंडाल स्थापित किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन 11 अक्टूबर 2026 को अग्निमित्रा पॉल ने किया।इस आयोजन में बंगाल की पारंपरिक दुर्गा पूजा, कांथा कढ़ाई और संग्रहालय की ऐतिहासिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया।विशेष प्रदर्शनी में पारंपरिक हस्तशिल्प, देवी दुर्गा की कलात्मक प्रस्तुतियां और महिला कारीगरों द्वारा तैयार किए गए वस्त्रों को प्रमुखता दी गई।
कांथा कढ़ाई के जरिए दिखाई बंगाल की विरासत
कांथा कढ़ाई पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध पारंपरिक हस्तकला है। इसमें कपड़ों पर बारीक टांकों की सहायता से विभिन्न आकृतियां और कलात्मक डिजाइन तैयार किए जाते हैं।इस विशेष आयोजन में कांथा कलाकारों द्वारा तैयार कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ एक विशेष गैलरी में 'SHE कांथा' की चार दशकों की यात्रा को दिखाया गया।इस प्रदर्शनी के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार संस्था ने पारंपरिक कांथा कला को संरक्षित करने और आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास किया है।इंडियन म्यूजियम की इस पहल में सैकड़ों महिला कारीगरों की भागीदारी रही।
महिला सशक्तिकरण पर KKR का विशेष ध्यान
कोलकाता नाइट राइडर्स ने इस आयोजन को खेल के मैदान से आगे बढ़कर सामाजिक योगदान देने की पहल बताया।केकेआर की मुख्य विपणन अधिकारी बिंदा डे ने कहा कि बंगाल से गहरा जुड़ाव रखने वाली फ्रेंचाइजी के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य महिला कारीगरों के कौशल को पहचान दिलाना और उनके लिए आर्थिक स्वतंत्रता के अवसर बढ़ाना है।केकेआर ने अपने 'शाहोशी रानी' कार्यक्रम के माध्यम से भी वंचित समुदायों की महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
दुर्गा पूजा में महिलाओं ने किया विशेष नृत्य
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केकेआर समर्थित कलकत्ता फाउंडेशन से जुड़ी शाहोशी रानियों ने पारंपरिक धुनुची नृत्य प्रस्तुत किया।नृत्य के माध्यम से महिलाओं ने मां दुर्गा का स्वागत किया और अपनी सांस्कृतिक पहचान तथा रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और उनकी प्रतिभा को सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराना है।
KKR खिलाड़ियों ने भी की कारीगरों से मुलाकात
17 अक्टूबर को सप्तमी के अवसर पर कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी राहुल त्रिपाठी और सौरभ दुबे भी दुर्गा पूजा पंडाल पहुंचे।दोनों खिलाड़ियों ने कांथा कारीगरों और शाहोशी रानी कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं से बातचीत की।इस अवसर पर विशेष 'KKR मेला' भी आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 100 कांथा कारीगरों, केकेआर प्रशंसक समूहों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने हिस्सा लिया।मेले में पारंपरिक कढ़ाई के प्रत्यक्ष प्रदर्शन, कार्यशालाओं और उद्यमिता से जुड़े सत्रों का आयोजन किया गया।
कारीगरों को नए अवसर दिलाने की कोशिश
इस पहल के माध्यम से महिला कारीगरों को अपने उत्पाद और कौशल व्यापक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।आयोजन के दौरान उद्यमिता, उत्पादों के प्रचार और आजीविका के अवसरों को लेकर भी चर्चा की गई।केकेआर और SHE कांथा का यह सहयोग दर्शाता है कि खेल से जुड़े संगठन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी भूमिका निभा सकते हैं।कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में आयोजित यह विशेष दुर्गा पूजा कार्यक्रम पारंपरिक कला, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।
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