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पश्चिम एशिया युद्ध में 23 भारतीयों की मौत, विदेश मंत्रालय ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े
Ratna Netam
3 Nov 2026 9:45 PM IST

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नई दिल्ली : 3 नवंबर 2026। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि फरवरी 2026 से जारी संघर्ष में अब तक 23 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें 15 भारतीय नाविक शामिल हैं, जो समुद्री जहाजों पर काम कर रहे थे। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित ब्लैक सी यानी काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में पांच अन्य भारतीय नागरिकों की जान गई है। विदेश मंत्रालय ने समुद्री मार्गों पर लगातार हो रहे हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए नागरिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत से संबंधित आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अब तक 23 भारतीयों की जान जा चुकी है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत थे।उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में मारे गए 23 भारतीयों और ब्लैक सी क्षेत्र में जान गंवाने वाले पांच भारतीयों के आंकड़े अलग-अलग हैं। इस प्रकार दोनों संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में कुल 28 भारतीय नागरिकों की मौत की जानकारी सामने आई है। ब्लैक सी क्षेत्र में दो अन्य भारतीय नागरिकों का अब तक पता नहीं चल सका है।
विदेश मंत्रालय की यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए ताजा हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। यह घटना सोमवार, 2 नवंबर को ओमान के लीमाह क्षेत्र के निकट हुई थी।विदेश मंत्रालय के अनुसार, एमएसवी अल जुसुफी (MSV AL JUSUFI) नामक व्यापारिक जहाज पर हमला किया गया। जहाज में कुल 14 भारतीय नागरिक सवार थे। हमले के बाद चलाए गए बचाव अभियान में 13 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक भारतीय नाविक की मौत हो गई।इस घटना के बाद पश्चिम एशिया संघर्ष में मारे गए भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई। इससे पहले अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में विदेश मंत्रालय ने 22 भारतीयों की मौत की पुष्टि की थी, जिनमें 14 नाविक शामिल थे।ओमान के निकट हुई घटना पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान नागरिक जहाजों को निशाना बनाया जाना अत्यंत चिंताजनक है।
भारत ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है। सरकार ने यह भी दोहराया कि समुद्री व्यापार में लगे नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ओमान में भारतीय अधिकारियों के माध्यम से प्रभावित लोगों की सहायता के प्रयास किए जा रहे हैं। सुरक्षित बचाए गए भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी और मृतक नाविक के पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री परिवहन व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़े हैं। इन मार्गों से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं का अंतरराष्ट्रीय परिवहन होता है।
भारत सहित कई देशों के नागरिक इन समुद्री जहाजों पर नाविक, इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे में व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ रहा है।भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री श्रम आपूर्ति करने वाले देशों में शामिल है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक विदेशी कंपनियों के जहाजों पर सेवाएं देते हैं। संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों पर उनकी मौजूदगी सुरक्षा संबंधी चुनौती बन गई है।विदेश मंत्रालय ने ब्लैक सी क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की मौत पर भी चिंता व्यक्त की है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के कारण इस समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।मंत्रालय के मुताबिक, ब्लैक सी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में अब तक पांच भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। इसके अतिरिक्त दो भारतीय लापता हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित भारतीयों के संबंध में जानकारी जुटाने और सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।ब्लैक सी अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। इसके माध्यम से अनाज, तेल और अन्य वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। युद्ध के दौरान जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले जुलाई में ब्लैक सी से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाज एमवी ओमोरफी (MV OMORFI) पर हमले में भी एक भारतीय नागरिक की मौत हुई थी। भारत ने उस घटना की निंदा करते हुए समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी।विदेश मंत्रालय समय-समय पर संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए सावधानी बरतने की सलाह जारी करता रहा है। विशेष रूप से जोखिम वाले क्षेत्रों में नौकरी स्वीकार करने से पहले सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करना महत्वपूर्ण बताया गया है।भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। सरकार का कहना है कि व्यापारिक जहाजों पर हमले केवल संबंधित जहाजों के कर्मचारियों के लिए खतरा नहीं हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी प्रभावित करते हैं।लगातार हो रही घटनाओं के बीच भारतीय नाविकों के परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। विदेशों में काम करने वाले नाविक लंबे समय तक समुद्र में रहते हैं और कई बार उन्हें ऐसे क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है, जहां सुरक्षा परिस्थितियां तेजी से बदल रही होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री मार्गों पर संघर्ष बढ़ने से जहाजों की परिचालन लागत, बीमा खर्च और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय माल परिवहन प्रभावित होने की आशंका रहती है।फिलहाल भारत सरकार ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी दोनों क्षेत्रों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई है। विदेश मंत्रालय प्रभावित देशों के अधिकारियों और भारतीय दूतावासों के माध्यम से स्थिति पर नजर रख रहा है।पश्चिम एशिया में 23 और ब्लैक सी में पांच भारतीयों की मौत के आंकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। समुद्री व्यापार से जुड़े हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए तनाव कम करना और नागरिक जहाजों को हमलों से बचाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
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