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ईरान का भारत को बड़ा तोहफा, भारतीय जहाजों के लिए खोला रास्ता

Ratna Netam
4 Nov 2026 4:35 PM IST
ईरान का भारत को बड़ा तोहफा, भारतीय जहाजों के लिए खोला रास्ता
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तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के लिए ईरान से महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ईरान ने कहा है कि भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर लगाए गए प्रतिबंधों से छूट दी गई है। ईरान के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक, भारत के अलावा चीन, इराक और कतर के जहाजों को भी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवागमन की अनुमति है। इस घोषणा को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगद्दम ने मंगलवार, 3 नवंबर को यह जानकारी दी। ईरानी समाचार एजेंसी आईएसएनए से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए प्रतिबंधों में छूट दी गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय और चीनी जहाजों से पारगमन शुल्क लिया जाता है, जबकि कतर के जहाजों को बिना शुल्क गुजरने की अनुमति है।इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान भारतीय जहाजों की आवाजाही को अनुमति देने की बात कर रहा है, लेकिन इसका अर्थ सभी प्रकार की शर्तों और शुल्क से पूरी तरह छूट मिलना नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा प्रभाव भारतीय तेल कंपनियों, आयातकों और घरेलू ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। इस रास्ते पर समुद्री यातायात बाधित होने से जहाजों का बीमा, माल ढुलाई और परिवहन खर्च भी बढ़ने की आशंका रहती है।विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय जहाजों को आवाजाही की अनुमति मिलने से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर पैदा हुई कुछ चिंताएं कम हो सकती हैं। हालांकि, जहाजों की वास्तविक आवाजाही समुद्री सुरक्षा, बीमा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की सलाह पर निर्भर करेगी।पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने इस समुद्री क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। संघर्ष के दौरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और समुद्री गतिविधियों में बाधा की कई घटनाएं सामने आई हैं। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को अपने परिचालन और माल ढुलाई की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है।
रॉयटर्स की 4 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिम बढ़ने के कारण कुछ तेल आपूर्तिकर्ता जलडमरूमध्य के बाहर जहाजों के बीच तेल स्थानांतरण और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि किसी देश के जहाजों को अनुमति मिलने के बावजूद क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।भारत सरकार भी पिछले कई महीनों से खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। विदेश मंत्रालय और समुद्री प्रशासन से जुड़े अधिकारी ईरान सहित संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।भारत के नौवहन महानिदेशालय ने पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे। जुलाई 2026 में जारी सलाह में जहाज मालिकों और शिपिंग कंपनियों से अगले आदेश तक इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचने को कहा गया था। साथ ही सुरक्षा निगरानी बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया था।ऐसे में ईरान की ताजा घोषणा के बाद भी भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर जारी सरकारी दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण बने रहेंगे। भारतीय अधिकारियों की ओर से नई छूट के संबंध में विस्तृत परिचालन व्यवस्था की पुष्टि होना भी जरूरी है।
इससे पहले मार्च 2026 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत से भारतीय जहाजों की आवाजाही के मामले में कुछ सकारात्मक परिणाम मिले हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि सभी भारतीय जहाजों के लिए कोई एक समान औपचारिक व्यवस्था नहीं थी और प्रत्येक जहाज की आवाजाही अलग परिस्थितियों के आधार पर तय हो रही थी।उस दौरान कुछ भारतीय एलपीजी वाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे थे। भारत सरकार ने सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी रखी थी।अब ईरानी सांसद की नई घोषणा को इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान कुछ देशों के साथ व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए समुद्री आवाजाही के लिए अलग व्यवस्था अपना रहा है।बताया जा रहा है कि भारत से दवाओं की आपूर्ति ईरान के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा चीन, इराक और कतर के साथ ईरान के आर्थिक और क्षेत्रीय संबंध भी इस फैसले के संदर्भ में अहम हैं। हालांकि, इन देशों के जहाजों को मिलने वाली छूट की शर्तें एक जैसी नहीं हैं।भारत के लिए इस घोषणा का महत्व केवल पेट्रोलियम आयात तक सीमित नहीं है। भारतीय व्यापारिक जहाज खाड़ी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के सामानों का परिवहन करते हैं। समुद्री यातायात सामान्य रहने से आयात-निर्यात गतिविधियों और आपूर्ति व्यवस्था को सहारा मिल सकता है।इसके बावजूद सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त होने तक समुद्री परिवहन को सामान्य मानना जल्दबाजी होगी। जहाजों की आवाजाही में सुरक्षा समन्वय, समुद्री मार्ग की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन आवश्यक रहेगा।फिलहाल, ईरान की घोषणा से भारतीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा आयातकों को सकारात्मक संकेत मिला है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भारतीय जहाजों को दी गई छूट व्यवहार में किस प्रकार लागू होती है और क्या इससे समुद्री व्यापार की लागत तथा सुरक्षा संबंधी जोखिमों में कमी आती है।
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