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पाकिस्तान के स्थानीय चुनावों पर अमजद मिर्जा का बड़ा सवाल

Ratna Netam
23 Oct 2026 6:55 PM IST
पाकिस्तान के स्थानीय चुनावों पर अमजद मिर्जा का बड़ा सवाल
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नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि वास्तविक लोकतांत्रिक अधिकारों के बिना यह चुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक स्थानीय प्रतिनिधियों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता, पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक केवल मतदान कराने से स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा।
5 दिसंबर को प्रस्तावित हैं स्थानीय निकाय चुनाव
गिलगित-बाल्टिस्तान में 5 दिसंबर 2026 को स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान निर्धारित किया गया है। इसके तहत गिलगित, स्कर्दू और चिलास की नगर निगम सीटों पर चुनाव होंगे।गिलगित-बाल्टिस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त राजा शाहबाज खान ने 15 अक्टूबर को संशोधित चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी।इस क्षेत्र में करीब 22 वर्षों से स्थानीय निकाय चुनाव नहीं हुए हैं। चुनाव पहले फरवरी 2026 में प्रस्तावित थे, लेकिन मौसम और स्थानीय सरकार से जुड़े कानून में संशोधन सहित विभिन्न कारणों से इन्हें कई बार स्थगित करना पड़ा।
अमजद अयूब मिर्जा ने उठाए गंभीर सवाल
यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने स्थानीय निकाय चुनावों की उपयोगिता पर सवाल उठाए।उन्होंने पूछा कि क्या इन चुनावों के बाद निर्वाचित पार्षदों, परिषदों और मेयरों को वास्तव में निर्णय लेने के अधिकार दिए जाएंगे या फिर वे मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के अधीन सीमित शक्तियों के साथ काम करेंगे।मिर्जा के अनुसार, लोकतंत्र की वास्तविक सफलता केवल चुनाव कराने में नहीं, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं का समाधान करने योग्य अधिकार देने में है।उन्होंने आशंका जताई कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों को पर्याप्त अधिकार नहीं मिले, तो स्थानीय निकाय केवल नाममात्र की संस्थाएं बनकर रह सकते हैं।
विकास निधि और प्रशासनिक अधिकारों पर सवाल
मिर्जा ने स्थानीय निकायों को मिलने वाली वित्तीय शक्तियों को लेकर भी चिंता जताई।उन्होंने सवाल किया कि क्या चुने हुए मेयर और पार्षद अपने क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकेंगे।उनका कहना है कि यदि स्थानीय प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया गया, तो लोगों की अपेक्षाएं पूरी करना मुश्किल होगा।उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई।हालांकि, मिर्जा के ये आरोप और आशंकाएं उनका राजनीतिक आकलन हैं। इससे यह स्थापित नहीं होता कि आगामी चुनावों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को कोई अधिकार नहीं मिलेंगे।
नए स्थानीय सरकार कानून में हुए बदलाव
गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने अक्टूबर 2026 में संशोधित स्थानीय सरकार अधिनियम पारित किया है।इस कानून के तहत स्थानीय प्रशासनिक ढांचे में बदलाव किए गए हैं। पहले स्थानीय निकायों की सात श्रेणियां थीं, जिन्हें घटाकर चार कर दिया गया है।अब जिला परिषद, यूनियन परिषद, नगरपालिका समितियां और नगर निगम स्थानीय शासन व्यवस्था का हिस्सा होंगे।संशोधित नियमों के अनुसार, नगर निगमों में निर्वाचित सदस्य मेयर और डिप्टी मेयर का चयन करेंगे। इसके अलावा स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 17 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी रखा गया है।
दो चरणों में होंगे चुनाव
चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, पहले चरण में 5 दिसंबर को गिलगित, चिलास और स्कर्दू में मतदान कराया जाएगा।इसके बाद अप्रैल 2027 में जिला परिषदों, नगरपालिका समितियों और यूनियन परिषदों के चुनाव आयोजित किए जाएंगे।चुनाव अधिकारियों के अनुसार, दूरदराज के इलाकों में बर्फबारी और कठिन मौसम को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम बनाया गया है।चुनाव प्रक्रिया के तहत स्वतंत्र उम्मीदवारों को भी मैदान में उतरने की अनुमति दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय निकायों की बहाली से बुनियादी नागरिक सेवाओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।
22 साल बाद चुनाव, लेकिन अधिकारों पर बहस
गिलगित-बाल्टिस्तान में लंबे अंतराल के बाद प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों को प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।वहीं, अमजद अयूब मिर्जा जैसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के साथ वास्तविक अधिकारों का हस्तांतरण भी जरूरी है।उनके अनुसार, स्थानीय जनता को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी और अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से विकास कार्यों की निगरानी का अधिकार मिलना चाहिए।फिलहाल चुनावी कार्यक्रम घोषित हो चुका है और प्रशासनिक तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। आने वाले समय में यह महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचित स्थानीय निकायों को कितनी वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता मिलती है।
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