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दोनों देशों की सेनाओं ने पहली स्टाफ वार्ता में बढ़ाया सहयोग

Ratna Netam
19 Sept 2026 3:23 PM IST
दोनों देशों की सेनाओं ने पहली स्टाफ वार्ता में बढ़ाया सहयोग
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नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच रक्षा सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। दोनों देशों की सेनाओं ने पहली बार **आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता (Army-to-Army Staff Talks)** आयोजित की। तीन दिवसीय यह वार्ता 16 से 18 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में हुई। इसमें दोनों पक्षों ने सैन्य प्रशिक्षण के आदान-प्रदान को बढ़ाने, संयुक्त क्षमता निर्माण और दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की।भारतीय सेना के मुताबिक, पहली आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर मौजूदा संबंधों को और मजबूत करना तथा भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना था। बातचीत में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार और संयुक्त क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
पहली बार हुई आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से रक्षा और सैन्य संबंध रहे हैं। हालांकि, दोनों सेनाओं के बीच इस तरह की पहली औपचारिक आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता का आयोजन 16 से 18 सितंबर के बीच नई दिल्ली में किया गया।भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि इस बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा की। इसमें प्रशिक्षण आदान-प्रदान को विस्तार देने और संयुक्त क्षमता निर्माण को मजबूत करने के विकल्पों पर बातचीत हुई।इस पहल को दोनों देशों के सैन्य संबंधों में एक नए संस्थागत तंत्र के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल मौजूदा गतिविधियों को जारी रखना नहीं, बल्कि भविष्य में दोनों सेनाओं के बीच अधिक व्यवस्थित सहयोग के अवसर तैयार करना भी है।
प्रशिक्षण आदान-प्रदान बढ़ाने पर जोर
बैठक में सैन्य प्रशिक्षण को द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की संभावनाओं पर विचार किया।संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य क्षमता निर्माण से दोनों देशों की सेनाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता साझा करने का अवसर मिलता है। इसके जरिए सैन्य अधिकारियों और जवानों के बीच पेशेवर संपर्क भी मजबूत हो सकते हैं।भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहले से ही विभिन्न स्तरों पर सैन्य संपर्क और अभ्यास होते रहे हैं। पहली स्टाफ वार्ता के जरिए इस सहयोग को व्यापक और संस्थागत रूप देने पर चर्चा हुई।
दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया
स्टाफ वार्ता के दौरान दक्षिण अफ्रीका से आए प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं और रक्षा निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी देखा।प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की **आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी परियोजनाओं** का निरीक्षण किया। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने **505 आर्मी बेस वर्कशॉप** का भी दौरा किया।इस दौरे के दौरान दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल को भारतीय सेना में तकनीकी आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण से जुड़ी क्षमताओं के बारे में जानकारी दी गई। AI जैसी उभरती तकनीकों का सैन्य क्षेत्र में इस्तेमाल दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तकनीकी अनुभवों और क्षमताओं को साझा करने की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
रक्षा निर्माण और तकनीकी आधुनिकीकरण पर भी नजर
505 आर्मी बेस वर्कशॉप के दौरे के दौरान दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की रखरखाव और तकनीकी क्षमताओं को करीब से देखा। इस तरह के सैन्य प्रतिष्ठान सेना के उपकरणों और प्रणालियों के रखरखाव तथा तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।भारतीय सेना में स्वदेशी तकनीक और स्थानीय रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने पर पिछले कुछ वर्षों में जोर दिया गया है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का भारतीय सैन्य तकनीक और रक्षा निर्माण से जुड़ी क्षमताओं को देखना दोनों देशों के बीच संभावित तकनीकी सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।हालांकि, पहली स्टाफ वार्ता के दौरान किसी विशेष नए रक्षा समझौते या हथियार सौदे की घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सैन्य संबंधों को मजबूत करने की पहल के तौर पर देखना अधिक उचित होगा।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामफोसा की मुलाकात के बाद हुई वार्ता
आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता ऐसे समय हुई है जब भारत और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति **सिरिल रामफोसा** ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी।इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-दक्षिण अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच व्यापार, खनन और महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढांचा, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती तकनीक और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों को साझा ऐतिहासिक संघर्षों, सांस्कृतिक संबंधों, आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच मजबूत संपर्कों पर आधारित बताया।
ग्लोबल साउथ को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग को केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देश अफ्रीका के विकास, ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और अधिक संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए मिलकर काम करेंगे।भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों ही ग्लोबल साउथ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाते रहे हैं। दोनों देशों के बीच BRICS, G20 और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर हुई मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों ने भारत-दक्षिण अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी के पूरे दायरे की समीक्षा की। इसमें **भारत-SACU व्यापार समझौता, खनन और महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढांचा, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती तकनीक और कौशल विकास** जैसे मुद्दे शामिल रहे।
महत्वपूर्ण खनिजों पर भी सहयोग
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण खनिजों का मुद्दा भी शामिल रहा। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीक के विकास के साथ लिथियम, कोबाल्ट, निकल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक मांग बढ़ी है।दक्षिण अफ्रीका खनिज संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण देश है, जबकि भारत अपनी औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति पर ध्यान दे रहा है। ऐसे में खनन और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों का हिस्सा बन रहा है।हालांकि, सेना की स्टाफ वार्ता का तत्काल फोकस मुख्य रूप से रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर था। महत्वपूर्ण खनिजों और व्यापार जैसे मुद्दे शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर हुई व्यापक द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा थे।
भारत-दक्षिण अफ्रीका के पुराने संबंध
भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। दोनों देशों के बीच संबंधों में महात्मा गांधी से जुड़ा साझा इतिहास भी महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण अफ्रीका में गांधी के प्रवास और वहां उनके राजनीतिक-सामाजिक अनुभवों ने भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को विशेष ऐतिहासिक आयाम दिया।आज दोनों देशों के संबंध राजनीति और इतिहास से आगे बढ़कर व्यापार, रक्षा, तकनीक, शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और बहुपक्षीय सहयोग तक पहुंच चुके हैं।रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच नौसेना और अन्य सैन्य स्तरों पर संपर्क भी होते रहे हैं। पहली आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता इसी व्यापक सैन्य संपर्क को आगे बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम है।
सैन्य संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता का महत्व इस बात में है कि इससे दोनों सेनाओं के बीच नियमित संस्थागत संवाद के लिए मंच तैयार होता है। ऐसी वार्ताओं में प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, सैन्य अनुभवों के आदान-प्रदान और भविष्य की गतिविधियों जैसे विषयों पर चर्चा की जा सकती है।दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर संपर्क बढ़ने से संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों और सैन्य सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसके अलावा तकनीकी आधुनिकीकरण और नई तकनीकों के इस्तेमाल के क्षेत्र में अनुभव साझा करने के अवसर मिल सकते हैं।भारत के लिए अफ्रीकी देशों के साथ रक्षा सहयोग का विस्तार व्यापक रणनीतिक संबंधों का हिस्सा है। दक्षिण अफ्रीका महाद्वीप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और BRICS जैसे मंचों पर भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है।
आगे सहयोग के नए रास्ते खुलने की संभावना
पहली आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता के बाद दोनों सेनाओं के बीच प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बनी हैं। हालांकि, आने वाले समय में किस स्तर पर और किन क्षेत्रों में नए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, इसकी जानकारी संबंधित आधिकारिक घोषणाओं से ही स्पष्ट होगी।इस वार्ता के दौरान दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का AI परियोजनाओं और 505 आर्मी बेस वर्कशॉप का दौरा भी यह दिखाता है कि सैन्य सहयोग का दायरा केवल पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों से जुड़े अनुभव भी भविष्य के सहयोग का हिस्सा बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, **16 से 18 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में हुई पहली भारत-दक्षिण अफ्रीका आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता** ने दोनों देशों के सैन्य संबंधों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर दिया। वार्ता में प्रशिक्षण आदान-प्रदान और संयुक्त क्षमता निर्माण पर जोर रहा, जबकि दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की AI परियोजनाओं और रक्षा तकनीक से जुड़ी क्षमताओं का भी जायजा लिया।यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की हालिया उच्चस्तरीय बातचीत की व्यापक पृष्ठभूमि में हुई है, जिसमें दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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