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इस्लामाबाद : पाकिस्तान में आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार को रिटर्न के साथ मिलने वाले आयकर भुगतान में गिरावट देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी संख्या में नए करदाताओं ने आयकर रिटर्न दाखिल किया, लेकिन इनमें से करीब 39 प्रतिशत रिटर्न ऐसे रहे, जिनमें किसी तरह की आयकर देनदारी नहीं बताई गई। इस स्थिति के कारण रिटर्न की संख्या बढ़ने के बावजूद टैक्स के रूप में जमा होने वाली राशि पिछले साल की तुलना में कम हो गई।
पाकिस्तान के संघीय राजस्व बोर्ड (एफबीआर) द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, करदाताओं ने 30 सितंबर तक अपने आयकर रिटर्न के साथ कुल 77.3 अरब रुपये का भुगतान किया। पिछले साल इसी अवधि के दौरान यह राशि 83.3 अरब रुपये थी। इस तरह रिटर्न के साथ जमा होने वाले आयकर में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह अंतर ऐसे समय सामने आया है, जब आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष के दौरान लगभग 17.9 लाख अतिरिक्त आयकर रिटर्न दाखिल किए गए। बड़ी संख्या में नए रिटर्न दाखिल होना कर प्रणाली के दायरे में अधिक लोगों के आने का संकेत देता है। हालांकि, टैक्स भुगतान के आंकड़ों ने अलग तस्वीर पेश की है। रिटर्न की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद सरकार के पास जमा होने वाली राशि में वृद्धि नहीं हुई और इसके विपरीत इसमें गिरावट दर्ज की गई।
इस पूरे आंकड़े में सबसे महत्वपूर्ण बात शून्य रिटर्न की संख्या है। इस वर्ष दाखिल किए गए कुल आयकर रिटर्न में करीब 39 प्रतिशत शून्य रिटर्न बताए गए हैं। शून्य रिटर्न का मतलब है कि संबंधित करदाता ने रिटर्न तो दाखिल किया, लेकिन उसमें किसी प्रकार का आयकर देय नहीं बताया। ऐसे में करदाता रिकॉर्ड में तो शामिल हो गया, लेकिन रिटर्न के साथ सरकार को कोई टैक्स भुगतान प्राप्त नहीं हुआ।
इस स्थिति ने पाकिस्तान में करदाताओं की बढ़ती संख्या और वास्तविक टैक्स कलेक्शन के बीच अंतर को सामने ला दिया है। एक तरफ रिटर्न दाखिल करने वालों का आधार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिटर्न के साथ मिलने वाला भुगतान घट रहा है। आंकड़ों से साफ है कि केवल आयकर रिटर्न की संख्या में बढ़ोतरी से टैक्स के रूप में मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी सुनिश्चित नहीं हो रही है।
एफबीआर के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 30 सितंबर तक रिटर्न के साथ 83.3 अरब रुपये जमा किए गए थे। इस साल समान अवधि में यह आंकड़ा घटकर 77.3 अरब रुपये रह गया। यानी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 6 अरब रुपये कम जमा हुए। प्रतिशत के हिसाब से यह गिरावट लगभग 7 प्रतिशत बैठती है।
चालू वित्तीय वर्ष में 17.9 लाख अतिरिक्त रिटर्न दाखिल होने के बावजूद भुगतान में गिरावट इसलिए भी चर्चा का विषय बनी है क्योंकि आम तौर पर करदाताओं की संख्या बढ़ने के साथ राजस्व संग्रह में भी बढ़ोतरी की उम्मीद की जाती है। लेकिन बड़ी संख्या में शून्य रिटर्न दाखिल होने से करदाताओं की संख्या और वास्तविक भुगतान के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
करीब 39 प्रतिशत शून्य रिटर्न का आंकड़ा यह बताता है कि रिटर्न दाखिल करने वाले प्रत्येक दस लोगों में लगभग चार ने किसी प्रकार की आयकर देनदारी नहीं दिखाई। ऐसे करदाता आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की कुल संख्या का हिस्सा हैं, लेकिन उनसे रिटर्न के साथ कोई प्रत्यक्ष कर भुगतान नहीं आया।
पाकिस्तान के लिए राजस्व संग्रह लंबे समय से आर्थिक प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सरकार के खर्च, विकास कार्यों और अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए कर संग्रह अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में करदाताओं का आधार बढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसके साथ वास्तविक टैक्स भुगतान में वृद्धि होना भी जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों में रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या और भुगतान के बीच यही अंतर प्रमुख रूप से सामने आया है।
नए आंकड़ों से फिलहाल यह तस्वीर बनती है कि पाकिस्तान में आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसका सीधा फायदा टैक्स भुगतान में नहीं दिखा। 17.9 लाख अतिरिक्त रिटर्न के बावजूद रिटर्न के साथ जमा रकम 83.3 अरब रुपये से घटकर 77.3 अरब रुपये रह गई। वहीं करीब 39 प्रतिशत शून्य रिटर्न ने इस अंतर को और स्पष्ट कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़े हुए करदाता आधार का असर पाकिस्तान के कुल कर राजस्व पर किस तरह दिखाई देता है।
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