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ताजिकिस्तान पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग पर रहेगा जोर

Ratna Netam
19 Oct 2026 9:44 PM IST
ताजिकिस्तान पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग पर रहेगा जोर
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नई दिल्ली/दुशान्बे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की महत्वपूर्ण बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे पहुंचे। यहां 19 और 20 अक्टूबर को शंघाई सहयोग संगठन के शासनाध्यक्षों की परिषद (काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट) की 25वीं बैठक आयोजित की जा रही है। इस उच्चस्तरीय बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, परिवहन संपर्क, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।दुशान्बे हवाई अड्डे पर पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक स्वागत किया गया। ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री एमोमाली सोबिरजोदा और विदेश मंत्रालय के एशिया-प्रशांत प्रभाग के प्रमुख शेराली जोनोंन ने उनका स्वागत किया। राजनाथ सिंह की इस यात्रा को भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर साझा की यात्रा की जानकारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान रवाना होने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की।उन्होंने लिखा, "नई दिल्ली से दुशान्बे के लिए रवाना हो रहा हूं। 19-20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान में होने वाली SCO 'हेड्स ऑफ गवर्नमेंट' बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्सुक हूं।"रक्षा मंत्रालय ने भी इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि भारत बैठक के माध्यम से सदस्य देशों के साथ व्यावहारिक और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर देगा।
व्यापार और निवेश पर रहेगा विशेष जोर
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक का प्रमुख उद्देश्य शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है।इस दौरान व्यापारिक संबंधों के विस्तार, निवेश के नए अवसरों और क्षेत्रीय परिवहन संपर्क को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।सदस्य देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय सहयोग की विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।भारत इस मंच के जरिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में अपनी भागीदारी को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप पर चर्चा
भारत शंघाई सहयोग संगठन के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहा है। विशेष रूप से स्टार्टअप, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत सदस्य देशों के बीच डिजिटल तकनीक और नवाचार आधारित सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़ी पहलों और स्टार्टअप क्षेत्र के अनुभवों से अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।बैठक में इन क्षेत्रों में आपसी अनुभव साझा करने और भविष्य की साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
संगठन के वित्तीय और संस्थागत कामकाज की समीक्षा
एससीओ की इस बैठक में संगठन की मौजूदा गतिविधियों और विभिन्न सहयोग कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।सदस्य देश संगठन के वित्तीय और संस्थागत कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करेंगे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक का उद्देश्य पहले से चल रही पहलों की समीक्षा करने के साथ भविष्य की प्राथमिकताओं को निर्धारित करना भी है।इससे सदस्य देशों को आपसी सहयोग की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार करने का अवसर मिलेगा।
क्या है शंघाई सहयोग संगठन?
शंघाई सहयोग संगठन एक प्रमुख क्षेत्रीय बहुपक्षीय मंच है, जिसकी स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी।वर्तमान में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस इसके पूर्ण सदस्य हैं।भारत वर्ष 2017 में इस संगठन का पूर्ण सदस्य बना था। एससीओ का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, राजनीतिक संवाद और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक मुख्य रूप से आर्थिक और बहुपक्षीय सहयोग से संबंधित विषयों पर केंद्रित रहती है।
पिछली बैठक में जयशंकर ने किया था भारत का प्रतिनिधित्व
शंघाई सहयोग संगठन के शासनाध्यक्षों की परिषद की पिछली बैठक 18 नवंबर 2025 को रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित हुई थी।उस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया था।इस बार 25वीं बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। बैठक के दौरान भारत को अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक विषयों पर विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?
मध्य एशिया भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। क्षेत्रीय संपर्क, व्यापारिक अवसरों और ऊर्जा संसाधनों की दृष्टि से इन देशों के साथ सहयोग बढ़ाना भारत के लिए उपयोगी है।एससीओ जैसे मंच पर भागीदारी से भारत को विभिन्न सदस्य देशों के साथ आर्थिक तथा रणनीतिक हितों पर संवाद करने का अवसर मिलता है।राजनाथ सिंह की इस यात्रा के दौरान संगठन के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाने और मौजूदा पहलों की प्रगति पर चर्चा की जाएगी।दो दिवसीय बैठक से व्यापार, निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, ठोस निर्णय और समझौतों की स्थिति बैठक समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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