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भारत रूस के बीच उड़ानों पर पाबंदियां घटाने की मांग, सुभाष गोयल ने गिनाए फायदे

Ratna Netam
2 Nov 2026 6:24 PM IST
भारत रूस के बीच उड़ानों पर पाबंदियां घटाने की मांग, सुभाष गोयल ने गिनाए फायदे
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नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच पर्यटन, व्यापार और हवाई संपर्क को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए 'ओपन स्काई पॉलिसी' लागू करने की मांग उठी है। पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रमुख कारोबारी और STIC ट्रैवल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष गोयल ने दोनों देशों के बीच हवाई सेवाओं को अधिक उदार बनाने की वकालत की है। उनका मानना है कि यदि भारत और रूस के बीच उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाए और विमानन क्षेत्र में प्रतिबंधों को कम किया जाए, तो पर्यटन और व्यापार में 50 से 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, यह संभावित वृद्धि का अनुमान है, न कि किसी आधिकारिक अध्ययन से प्रमाणित परिणाम।सुभाष गोयल लंबे समय से भारत में अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने और पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में विश्वस्तरीय हवाई अड्डों का निर्माण हुआ है, लेकिन कई हवाई अड्डों की अंतरराष्ट्रीय क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में विदेशी विमानन कंपनियों को अधिक उड़ानें संचालित करने की अनुमति देने से पर्यटन उद्योग को लाभ मिल सकता है।
ओपन स्काई पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य देशों के बीच हवाई सेवाओं को अधिक उदार बनाना है। इसके तहत द्विपक्षीय विमानन समझौतों में उड़ानों की संख्या, सीटों की क्षमता और कुछ परिचालन प्रतिबंधों में छूट दी जा सकती है। इससे विमानन कंपनियों को नए मार्गों पर उड़ानें शुरू करने और यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है। हालांकि, ऐसी नीति की वास्तविक शर्तें दोनों देशों के बीच होने वाले समझौतों पर निर्भर करती हैं।भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत राजनयिक, रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रूस के पर्यटक भारत के गोवा, केरल और अन्य पर्यटन स्थलों में रुचि रखते हैं। वहीं भारतीय पर्यटकों के लिए मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे शहर आकर्षण का केंद्र हैं। बेहतर हवाई संपर्क से दोनों देशों के यात्रियों को अधिक सुविधाएं मिल सकती हैं।
गोयल का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल आधुनिक हवाई अड्डे बनाना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, यात्रियों के लिए पर्याप्त सीटों की उपलब्धता, सुविधाजनक उड़ान समय और प्रतिस्पर्धी किराए भी आवश्यक हैं। उन्होंने पूर्व में कहा था कि भारत को अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को व्यापक अवसर देने चाहिए।भारत और रूस के बीच अधिक सीधी उड़ानें शुरू होने से यात्रियों को तीसरे देश के माध्यम से यात्रा करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे यात्रा में लगने वाला समय घट सकता है और कनेक्टिंग उड़ानों पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, हवाई किराए में कमी का वास्तविक असर मांग, प्रतिस्पर्धा, ईंधन की कीमतों और विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर निर्भर करेगा।पर्यटन उद्योग के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बेहतर हवाई संपर्क का लाभ मिल सकता है। दोनों देशों के कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों, निवेशकों और उद्योग संगठनों के लिए यात्रा आसान होने से व्यावसायिक बैठकों, प्रदर्शनियों और निवेश संबंधी गतिविधियों में तेजी आ सकती है। विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
भारत सरकार भी रूस के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सितंबर 2026 में कहा था कि दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर के स्तर पर है और निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले चार वर्षों में लगभग 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि आवश्यक होगी।पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच व्यापार को विविधता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि ऊर्जा क्षेत्र के अलावा दवाइयों, ऑटोमोबाइल उपकरणों, खाद्य उत्पादों, इंजीनियरिंग सामान और अन्य वस्तुओं के व्यापार में पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही भारत और रूस स्थानीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने तथा परिवहन संपर्क बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं।पर्यटन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में वृद्धि से होटल, रेस्तरां, परिवहन, ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय पर्यटन सेवाओं को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। अधिक विदेशी पर्यटकों के आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, पर्यटन में वास्तविक वृद्धि के लिए वीजा सुविधा, सुरक्षा, प्रचार-प्रसार और बुनियादी ढांचे में सुधार भी आवश्यक होगा।
नीति आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट में भी भारत के पर्यटन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहुंच और नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने की आवश्यकता रेखांकित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा की जटिल प्रक्रियाएं और अन्य बाधाएं इस क्षेत्र के विकास को प्रभावित करती हैं।भारत और रूस के बीच पर्यटन सहयोग बढ़ाने की दिशा में पहले भी प्रयास किए गए हैं। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों में पर्यटन, लोगों के बीच संपर्क और वीजा व्यवस्था को आसान बनाने के महत्व को स्वीकार किया है। इससे स्पष्ट होता है कि हवाई संपर्क बढ़ाने का मुद्दा व्यापक आर्थिक और राजनयिक सहयोग से भी जुड़ा हुआ है।हालांकि, ओपन स्काई पॉलिसी लागू करने से पहले विमानन कंपनियों के व्यावसायिक हितों, हवाई अड्डों की क्षमता, सुरक्षा नियमों और द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा करना आवश्यक होगा। घरेलू विमानन कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पहलू रहेगी।फिलहाल सुभाष गोयल की मांग ने भारत-रूस के बीच हवाई संपर्क और पर्यटन विस्तार की संभावनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। यदि दोनों देश उड़ानों की संख्या बढ़ाने और विमानन नियमों को अधिक उदार बनाने की दिशा में कदम उठाते हैं, तो इससे यात्रियों, पर्यटन कारोबारियों और व्यापारिक समुदाय को नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, पर्यटन और व्यापार में 50 से 100 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान कितना व्यावहारिक है, इसका आकलन विस्तृत आंकड़ों और नीति के वास्तविक प्रभाव के आधार पर ही किया जा सकेगा।
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