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घाना पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर, व्यापार से रक्षा तक साझेदारी बढ़ाने पर हुई चर्चा

Kavita2
7 Oct 2026 10:58 AM IST
घाना पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर, व्यापार से रक्षा तक साझेदारी बढ़ाने पर हुई चर्चा
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अकरा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना दौरे के दौरान अपने समकक्ष सैम ओकुद्जेटो अबलाकवा से मुलाकात कर भारत-घाना संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, विकास सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा, प्रौद्योगिकी और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। इसके साथ ही अफ्रीकी यूनियन और पश्चिम अफ्रीकी देशों के संगठन ECOWAS के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव पर भी विचार-विमर्श किया गया।

जयशंकर अफ्रीकी देशों के अपने तीन-देशीय दौरे के पहले चरण में मंगलवार को घाना पहुंचे। दौरे के दौरान उन्होंने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की और भारत तथा घाना के बीच तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। भारत और घाना के रिश्तों में लंबे समय से व्यापार, विकास साझेदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के द्विपक्षीय दस्तावेजों में भी दोनों देशों के बीच व्यापार और विकास सहयोग के लंबे इतिहास का उल्लेख है।

अपने घाना के समकक्ष के साथ मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ग्लोबल साउथ के साझेदार के रूप में भारत और घाना की विकास संबंधी आकांक्षाएं और ऐतिहासिक एकजुटता समान हैं। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देश केवल पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।

भारत पिछले कुछ वर्षों से अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दे रहा है। खासतौर पर व्यापार, डिजिटल तकनीक, फार्मा, रक्षा सहयोग, कौशल विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में साझेदारी बढ़ाई जा रही है। घाना पश्चिम अफ्रीका में भारत के महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक रहा है।

दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत में व्यापार और निवेश को प्रमुख स्थान मिला। भारत और घाना के बीच पहले से ही व्यापारिक संबंध मौजूद हैं और दोनों देशों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। घाना की अर्थव्यवस्था में खनन, कृषि, ऊर्जा और सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका है, जबकि भारत फार्मास्यूटिकल्स, तकनीक, आईटी, शिक्षा और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकता है।

फार्मास्यूटिकल्स भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रहा। भारतीय दवा कंपनियों की अफ्रीका के कई देशों में मजबूत मौजूदगी है। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता के कारण भारत को अफ्रीकी स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। घाना के साथ इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं और दवा आपूर्ति को और मजबूती मिल सकती है।

क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावना है। भारत लंबे समय से अफ्रीकी देशों के अधिकारियों, छात्रों और पेशेवरों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए सहायता देता रहा है। तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल कौशल, शिक्षा और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के लिए भारत की कई योजनाएं अफ्रीकी साझेदार देशों में चलती रही हैं।

रक्षा सहयोग को भी दोनों मंत्रियों ने चर्चा में शामिल किया। हिंद महासागर और अफ्रीकी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, संगठित अपराध और साइबर खतरों जैसी चुनौतियों के बीच भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सुरक्षा संवाद का महत्व बढ़ा है। घाना के साथ रक्षा प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है।

तकनीक और डिजिटल सहयोग भी भारत-घाना संबंधों का नया महत्वपूर्ण आयाम बन रहा है। भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक और आईटी समाधानों के क्षेत्र में अपने अनुभव को अन्य देशों के साथ साझा कर रहा है। अफ्रीकी देशों में डिजिटल सेवाओं और तकनीकी विकास की बढ़ती मांग को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं व्यापक हैं।

जयशंकर और अबलाकवा ने अफ्रीकी यूनियन के साथ भारत के संबंधों पर भी चर्चा की। भारत लंबे समय से अफ्रीकी यूनियन के साथ संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देता रहा है। अफ्रीकी यूनियन को G20 में स्थायी सदस्य बनाए जाने का भारत ने भी समर्थन किया था। इससे भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिली है।

ECOWAS यानी इकोनॉमिक कम्युनिटी ऑफ वेस्ट अफ्रीकन स्टेट्स के साथ भारत के संबंधों का विषय भी चर्चा में रहा। घाना पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र का एक अहम देश है और ECOWAS के भीतर उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत इस क्षेत्र में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा और विकास सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

भारत और घाना के संबंधों का ऐतिहासिक आधार भी दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूती देता है। घाना अफ्रीका के उन देशों में शामिल रहा है, जिनके साथ भारत ने स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दौर से ही निकट संबंध बनाए। दोनों देशों के बीच संसदीय और व्यापारिक सहयोग की संरचनाएं भी लंबे समय से मौजूद हैं।

जयशंकर की राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से मुलाकात भी इसी व्यापक साझेदारी का हिस्सा रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। भारत ने हाल के वर्षों में ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रमुखता देने की बात बार-बार कही है, और जयशंकर की घाना यात्रा इसी नीति के अनुरूप देखी जा रही है।

घाना के बाद जयशंकर अपने अफ्रीकी दौरे के अगले चरण की ओर बढ़ेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य अफ्रीकी साझेदार देशों के साथ राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय समन्वय को और मजबूत करना है।

फिलहाल घाना में हुई बैठकों से यह संकेत मिला है कि भारत और घाना अब पारंपरिक मित्रता को नए क्षेत्रों तक विस्तार देना चाहते हैं। व्यापार, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीक, रक्षा और क्षमता निर्माण पर हुई चर्चा के साथ दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। यही वजह है कि जयशंकर की यह यात्रा भारत की व्यापक अफ्रीका नीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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