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अमेरिका में पहली बार मौत की सजा का टीवी पर लाइव प्रसारण

Ashish verma
9 Oct 2026 9:09 PM IST
अमेरिका में पहली बार मौत की सजा का टीवी पर लाइव प्रसारण
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वाशिंगटन। अमेरिका में वर्ष 2009 के फोर्ट हूड गोलीकांड के दोषी निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड देने और उसकी लाइवस्ट्रीमिंग करने की घोषणा की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा है कि सजा की प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाएगा। पूर्व सैन्य मेजर और मनोचिकित्सक हसन ने टेक्सास स्थित फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी कर 13 लोगों की हत्या की थी। घोषित कार्यक्रम के अनुसार उसे तीन दिसंबर को मृत्युदंड दिया जाना है। अमेरिका में किसी मृत्युदंड के ऐसे सार्वजनिक लाइव प्रसारण की यह अभूतपूर्व योजना है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सजा को सार्वजनिक रखने की बात कही थी। इसके बाद पेंटागन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया की लाइवस्ट्रीमिंग होगी और इससे संबंधित अतिरिक्त विवरण बाद में जारी किए जाएंगे। फिलहाल किसी निश्चित टीवी चैनल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी खास चैनल पर प्रसारण की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी घोषित योजना इंटरनेट के जरिए सीधा प्रसारण करने की है।
सेना के कार्यवाहक सचिव एडम टेल ने सजा की तारीख और स्थान की जानकारी दी है। उनके अनुसार हसन को गुरुवार, तीन दिसंबर 2026 को स्थानीय समयानुसार दोपहर एक बजे टेक्सास के फोर्ट हूड में मृत्युदंड दिया जाएगा। यह वही सैन्य अड्डा है, जहां उसने हमला किया था। टेल द्वारा साझा ज्ञापन के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अक्टूबर को सजा लागू करने के आदेश को मंजूरी दी थी। सजा की प्रक्रिया के लिए अमेरिकी सैन्य अनुशासनात्मक कारागार के कमांडेंट को जिम्मेदारी देने का उल्लेख भी ज्ञापन में है।
फोर्ट हूड में गोलीबारी पांच नवंबर 2009 को हुई थी। हसन सैन्य अड्डे के रेडीनेस प्रोसेसिंग सेंटर में पहुंचा और उसने गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 32 अन्य घायल हुए। मृतकों में एक गर्भवती सैनिक भी शामिल थी। इस घटना के बाद हसन के खिलाफ सैन्य न्याय प्रणाली के तहत मुकदमा चला। हमले से जुड़े अपराधों के लिए उसे दोषी ठहराया गया और सैन्य अदालत ने वर्ष 2013 में मौत की सजा सुनाई। अब उस सजा को लागू करने का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
हसन सेना में मनोचिकित्सक के रूप में कार्यरत था और मेजर के पद तक पहुंचा था। मृत्युदंड संबंधी मामलों की जानकारी संकलित करने वाली संस्था के अनुसार उसने सेना में लगभग 21 वर्ष सेवा की थी। हमले के समय उसकी अफगानिस्तान में तैनाती होने वाली थी। मौके पर जवाबी कार्रवाई के दौरान उसे गोली लगी और वह लकवाग्रस्त हो गया। बाद में सैन्य अदालत में उसने अपना पक्ष स्वयं रखा। उसकी सजा और उसे लागू करने की प्रक्रिया सैन्य न्याय व्यवस्था से संबंधित है, हालांकि नागरिक संघीय अदालतों में कानूनी समीक्षा का रास्ता भी महत्वपूर्ण है।
यदि घोषित कार्यक्रम के अनुसार सजा दी जाती है, तो यह वर्ष 1961 के बाद अमेरिकी सेना द्वारा लागू किया जाने वाला पहला मृत्युदंड होगा। इससे पहले सैनिक जॉन बेनेट को फांसी दी गई थी। वहीं अमेरिकी सेना की फायरिंग स्क्वॉड से पिछली सजा वर्ष 1945 में हुई थी। उस समय द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सैनिक एडी स्लोविक को सैन्य सेवा छोड़ने के अपराध में यह सजा दी गई थी। इसलिए “1961 के बाद पहला सैन्य मृत्युदंड” और “1945 के बाद पहला सैन्य फायरिंग स्क्वॉड मृत्युदंड” दो अलग ऐतिहासिक संदर्भ हैं।
सजा की तारीख तय होने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हो गई है। हसन नागरिक संघीय अदालत में अपनी हिरासत और सजा की वैधता की समीक्षा के लिए याचिका दाखिल कर सकता है। ऐसी न्यायिक कार्यवाही सजा लागू होने के कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए तीन दिसंबर को घोषित तारीख के रूप में लिखा जाना उचित है। अमेरिकी सेना की अपनी न्याय प्रणाली है और उसमें मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन युद्धकाल के बाहर इसका इस्तेमाल अपेक्षाकृत सीमित रहा है।
लाइव प्रसारण की योजना ने सार्वजनिक मृत्युदंड और उसके डिजिटल प्रसार को लेकर बहस भी शुरू कर दी है। मृत्युदंड के इतिहास का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार उन्हें किसी वैधानिक मृत्युदंड के पहले सार्वजनिक लाइव प्रसारण की जानकारी नहीं है। पहले कुछ मामलों में सजा की रिकॉर्डिंग बाद में सामने आई थी। उदाहरण के लिए सद्दाम हुसैन की फांसी के वीडियो घटना के बाद प्रसारित हुए थे। रिकॉर्डिंग बाद में दिखाना और प्रक्रिया को उसी समय लाइव दिखाना अलग स्थितियां हैं।
इस योजना की आलोचना भी सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने लाइवस्ट्रीमिंग की प्रस्तावित प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है और इसे यातना के समान बताया है। अमेरिकी सांसदों में दोनों प्रमुख दलों के कुछ सदस्यों ने भी कदम का विरोध किया है। आलोचना मुख्य रूप से मृत्युदंड को सार्वजनिक दृश्य में बदलने से संबंधित है। इससे दोषसिद्धि के मामले के साथ प्रसारण के तरीके पर अलग विवाद खड़ा हुआ है।
फिलहाल पेंटागन की घोषणा, सेना द्वारा निर्धारित तारीख और राष्ट्रपति की मंजूरी इस मामले के प्रमुख घटनाक्रम हैं। हसन को फोर्ट हूड में फायरिंग स्क्वॉड से मृत्युदंड देने की योजना है और उसका सीधा प्रसारण प्रस्तावित है। प्रसारण कहां उपलब्ध होगा तथा उसके लिए क्या व्यवस्था होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। आगामी आधिकारिक विवरण और किसी संभावित न्यायिक हस्तक्षेप से सजा लागू करने की स्थिति स्पष्ट होगी।
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