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नेपाल में बाढ़ से 1.66 अरब डॉलर का नुकसान, विश्व बैंक की रिपोर्ट

Ashish verma
9 Oct 2026 11:05 PM IST
नेपाल में बाढ़ से 1.66 अरब डॉलर का नुकसान, विश्व बैंक की रिपोर्ट
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काठमांडू। नेपाल में अगस्त की विनाशकारी बाढ़ ने जनजीवन के साथ अर्थव्यवस्था को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है। विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, आपदा से भौतिक संपत्तियों को लगभग 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ है। सबसे अधिक क्षति बुनियादी ढांचे को पहुंची है। सड़कें, पुल, ऊर्जा परियोजनाएं और भवन तबाह होने से प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियां बहाल करना बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट में पुनर्निर्माण के साथ भविष्य की आपदाओं से बचाव की तैयारी मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
विश्व बैंक ने छह अक्टूबर को ‘नेपाल डेवलपमेंट अपडेट: बिल्डिंग बैक डिफरेंटली फॉर द फ्यूचर’ रिपोर्ट जारी की। इसमें 26 अगस्त 2026 की बाढ़ के आर्थिक प्रभावों का आकलन किया गया है। नेपाल और चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में हिमनद से जुड़ी घटना के बाद अचानक बाढ़ और मलबे का प्रवाह आया था। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के रास्ते आगे बढ़ी इस आपदा ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में व्यापक तबाही मचाई।
विश्व बैंक के त्वरित आपदा नुकसान आकलन के मुताबिक, कुल प्रत्यक्ष संपत्ति क्षति में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत है। आवासीय भवनों का हिस्सा 11 प्रतिशत और गैर-आवासीय भवनों का छह प्रतिशत है। नेपाल सरकार के प्रारंभिक आकलन में भौतिक क्षति लगभग 1.81 अरब डॉलर तथा उत्पादन, आजीविका और जरूरी सेवाओं में व्यवधान समेत कुल आपदा प्रभाव करीब 2.7 अरब डॉलर बताया गया है। पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 4.8 अरब डॉलर की आवश्यकता आंकी गई है। ये अलग-अलग श्रेणियों के अनुमान हैं।
आर्थिक गतिविधियों पर असर मुख्य रूप से ऊर्जा, परिवहन, व्यापार और पर्यटन के माध्यम से पड़ने की बात कही गई है। ऊर्जा क्षेत्र, विशेषकर जलविद्युत, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। बाढ़ से 12 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। इनमें सात चालू परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। एक सौर ऊर्जा संयंत्र भी प्रभावित हुआ। बिजली उत्पादन के साथ पारेषण व्यवस्था को नुकसान होने से उद्योगों और अन्य आर्थिक गतिविधियों के सामने आपूर्ति संबंधी कठिनाइयां पैदा हुई हैं।
प्रभावित चालू जलविद्युत परियोजनाओं की संयुक्त क्षमता 256.1 मेगावाट और निर्माणाधीन परियोजनाओं की क्षमता 395.02 मेगावाट बताई गई है। पारेषण ढांचे को नुकसान से अतिरिक्त 149.6 मेगावाट क्षमता का संचालन बाधित हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित उत्पादन और पारेषण क्षमता लगभग 430.7 मेगावाट रही, जो वित्त वर्ष 2025-26 में नेपाल की स्थापित जलविद्युत और सौर क्षमता के करीब 10.6 प्रतिशत के बराबर है। पर्यटन क्षेत्र में भी 200 से अधिक होटल और रेस्तरां क्षतिग्रस्त हुए हैं।
बाढ़ के कारण लांगटांग, गोसाइंकुंड और कैलाश मानसरोवर मार्ग जैसे प्रमुख पर्यटन तथा तीर्थस्थलों तक पहुंच प्रभावित हुई है। विश्व बैंक के मुताबिक, पर्यटन पर भौतिक नुकसान के साथ यात्रा जोखिम को लेकर बढ़ी चिंता का भी असर पड़ सकता है। यह व्यवधान ऐसे समय आया जब नेपाल में सितंबर से नवंबर के बीच पर्यटन गतिविधियां बढ़ती हैं। कृषि नुकसान का राष्ट्रीय उत्पादन पर प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहने का अनुमान है, लेकिन प्रभावित इलाकों के परिवारों की आजीविका पर इसका गंभीर असर बताया गया है।
विश्व बैंक ने उद्योग और सेवा क्षेत्र में व्यवधान को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 में नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। क्षतिग्रस्त ऊर्जा और परिवहन ढांचे के कारण उत्पादन तथा माल की आवाजाही प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। हालांकि, पुनर्निर्माण और पुनर्वास गतिविधियों में तेजी आने पर वित्त वर्ष 2027-28 में वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह सुधार क्षतिग्रस्त सुविधाओं और उत्पादन क्षमता की बहाली पर निर्भर करेगा।
आपदा का मानवीय नुकसान भी बेहद बड़ा है। पांच अक्टूबर को अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कम से कम 1,455 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और 5,285 लोग लापता थे। कुल 13,795 लोगों को बचाया गया। सरकार ने सक्रिय खोज और बचाव अभियान समाप्त कर पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। अधिकारियों के मुताबिक, पुनर्वास कार्य के दौरान मिलने वाले अवशेष और सामान बरामद किए जाएंगे तथा जरूरत पड़ने पर आपात बचाव जारी रहेगा।
भविष्य के जोखिम घटाने के लिए नेपाल ने चार हिमनदीय झीलों का जलस्तर कम करने की योजना भी बताई है। थुलागी, लोअर बरुन, लुमडिंग त्शो और होंगु द्वितीय झीलों के लिए विस्तृत अध्ययन और डिजाइन का काम चालू वित्त वर्ष में शुरू किया जाएगा। लगभग पांच करोड़ डॉलर की इस परियोजना में नियंत्रित जलनिकासी, सेंसर, बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी व्यवस्था शामिल होगी। विस्तृत अध्ययन के बाद जलनिकासी का कार्य शुरू होगा और पूरी परियोजना में छह वर्ष तक लग सकते हैं।
विश्व बैंक ने पुनर्निर्माण में केवल पुरानी संपत्तियों को बहाल करने के बजाय जोखिम के अनुसार स्थान और डिजाइन चुनने की सलाह दी है। परिवहन, ऊर्जा और संचार नेटवर्क में वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने तथा प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली मजबूत करने पर जोर दिया गया है। बैंक के अनुसार, कमजोर परिवारों तक आपदा सहायता तेजी से पहुंचाने के लिए एकीकृत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। इन उपायों का उद्देश्य पुनर्बहाली के साथ भविष्य की आपदाओं में जरूरी सेवाओं को चालू रखने की क्षमता बढ़ाना है।
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