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उज्बेकिस्तान में MBBS करने वाले भारतीय छात्रों को लेकर सरकार सख्त

Ratna Netam
3 Nov 2026 10:05 PM IST
उज्बेकिस्तान में MBBS करने वाले भारतीय छात्रों को लेकर सरकार सख्त
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नई दिल्ली : 3 नवंबर 2026। विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए विदेश मंत्रालय ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उज्बेकिस्तान में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और भारतीय छात्रों के संभावित शोषण को लेकर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उज्बेकिस्तान में मेडिकल सहित अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि भारत और उज्बेकिस्तान में सक्रिय बेईमान एजेंटों या अन्य तत्वों द्वारा छात्रों का आर्थिक अथवा शैक्षणिक शोषण न हो। सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे पर उज्बेकिस्तान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। उनसे उज्बेकिस्तान में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में भारतीय छात्रों के प्रवेश में आई गिरावट के संबंध में सवाल पूछा गया था।जवाब में उन्होंने कहा कि भारत सरकार उज्बेकिस्तान में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के हितों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों को ऐसी मेडिकल शिक्षा मिले, जो भारत के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को गलत जानकारी देकर प्रवेश दिलाने, अनुचित शुल्क वसूलने या अवास्तविक वादे करने जैसी गतिविधियों से बचाना आवश्यक है।
हाल के वर्षों में उज्बेकिस्तान भारतीय मेडिकल विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक गंतव्य के रूप में उभरा है। भारत में मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटों और निजी संस्थानों में अधिक फीस के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी विदेश में एमबीबीएस करने का विकल्प तलाशते हैं।उज्बेकिस्तान के अलावा रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, जॉर्जिया और अन्य देशों में भी भारतीय छात्र चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि, विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करते समय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, पाठ्यक्रम की अवधि, व्यावहारिक प्रशिक्षण और भारत में डिग्री की मान्यता जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।विदेश मंत्रालय का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब उज्बेकिस्तान के मेडिकल संस्थानों में भारतीय छात्रों के नए दाखिलों में गिरावट की खबरें सामने आई हैं।रिपोर्टों के अनुसार, उज्बेकिस्तान में भारतीय मेडिकल छात्रों के प्रवेश को लेकर नियामकीय चिंताओं का असर पड़ा है। हालांकि, दाखिलों में गिरावट के वास्तविक कारणों और भविष्य की स्थिति को लेकर संबंधित संस्थानों तथा अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।इससे पहले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने अप्रैल 2026 में उज्बेकिस्तान के कुछ मेडिकल संस्थानों में प्रवेश लेने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए परामर्श जारी किया था।आयोग ने छात्रों और अभिभावकों से कहा था कि वे किसी भी विदेशी मेडिकल संस्थान में प्रवेश लेने से पहले निर्धारित नियमों और शैक्षणिक मानकों की सावधानीपूर्वक जांच करें।
एनएमसी ने विशेष रूप से विदेशी चिकित्सा स्नातक लाइसेंस नियम, 2021 (FMGL Regulations, 2021) के अनुपालन पर जोर दिया था। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा और प्रशिक्षण भारत में चिकित्सकीय पंजीकरण के लिए निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप हों।आयोग के संज्ञान में कुछ ऐसी शिकायतें भी आई थीं, जिनमें निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश देने, पर्याप्त व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं कराने और शिक्षण की भाषा से संबंधित समस्याओं का उल्लेख था।विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल शिक्षा में केवल कक्षा में पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं होता। विद्यार्थियों को अस्पतालों में मरीजों के साथ काम करने, चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को समझने और आवश्यक क्लिनिकल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर भी मिलना चाहिए।यदि किसी संस्थान में पर्याप्त अस्पताल सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक या निर्धारित पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं हैं, तो वहां पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।इसलिए एनएमसी ने छात्रों को विदेशी मेडिकल कॉलेजों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही प्रवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी है।
विदेश मंत्रालय की चिंता का एक महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा के नाम पर होने वाला संभावित आर्थिक शोषण भी है।विदेश में मेडिकल प्रवेश दिलाने वाली कुछ एजेंसियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों, फीस, छात्रावास, भाषा और डिग्री की मान्यता के बारे में जानकारी दी जाती है। ऐसे में यदि किसी एजेंट द्वारा भ्रामक जानकारी दी जाए, तो छात्रों और उनके परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।कई बार विद्यार्थी विदेश पहुंचने के बाद यह महसूस कर सकते हैं कि उन्हें प्रवेश से पहले जिन सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, वास्तविक स्थिति उनसे अलग है।इसी प्रकार अतिरिक्त शुल्क, दस्तावेज संबंधी समस्याएं और विश्वविद्यालय बदलने की कठिनाइयां भी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।इसलिए सरकार का जोर है कि भारतीय छात्र किसी भी एजेंट के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और संबंधित विश्वविद्यालय तथा आधिकारिक नियामक संस्थाओं से आवश्यक जानकारी की पुष्टि करें।हालांकि, एनएमसी की ओर से जारी सावधानी संबंधी परामर्श को उज्बेकिस्तान के सभी मेडिकल विश्वविद्यालयों में प्रवेश पर प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।इससे पहले ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया था कि अप्रैल 2026 का परामर्श एहतियाती प्रकृति का है। इसका उद्देश्य छात्रों को संभावित जोखिमों से अवगत कराना और संबंधित संस्थानों में नियामकीय मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करना है।
भारतीय छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उज्बेकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण प्राप्त कर पाएंगे या नहीं।विदेशी मेडिकल संस्थानों से डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को भारत में पंजीकरण के लिए लागू नियमों और निर्धारित परीक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।ऐसे में यदि कोई विदेशी विश्वविद्यालय आवश्यक शर्तों का पालन नहीं करता, तो वहां से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को भारत में चिकित्सकीय पंजीकरण प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।यही कारण है कि छात्रों को प्रवेश से पहले पाठ्यक्रम की अवधि, इंटर्नशिप, क्लिनिकल प्रशिक्षण, शिक्षण माध्यम और विश्वविद्यालय की कानूनी स्थिति की जांच करनी चाहिए।इस मामले में अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। विदेश में मेडिकल शिक्षा पर परिवारों की बड़ी धनराशि खर्च होती है। ऐसे में किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले फीस और अन्य खर्चों का लिखित विवरण प्राप्त करना बेहतर होता है।विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ इस विषय पर बातचीत जारी रखेगा। सरकार का प्रयास रहेगा कि भारतीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उनके हितों की रक्षा हो।भारत और उज्बेकिस्तान के बीच शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। ऐसे में मेडिकल शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।फिलहाल विदेश मंत्रालय के बयान से यह स्पष्ट है कि सरकार विदेश में पढ़ने वाले भारतीय विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता और सुरक्षा को गंभीरता से ले रही है।विदेश में एमबीबीएस की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए सरकार का संदेश है कि प्रवेश लेने से पहले विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता और एनएमसी के नियमों की अच्छी तरह जांच करें। इससे न केवल आर्थिक नुकसान का खतरा कम होगा, बल्कि भविष्य में भारत में चिकित्सकीय करियर बनाने से संबंधित परेशानियों से भी बचा जा सकेगा।
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